मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:32 · नई दिल्ली संस्करण

बंगाल-असम-यूपी की एसआईआर प्रक्रिया पर 'सुप्रीम' सुनवाई, केंद्र-चुनाव आयोग को नोटिस जारी

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
बंगाल-असम-यूपी की एसआईआर प्रक्रिया पर 'सुप्रीम' सुनवाई, केंद्र-चुनाव आयोग को नोटिस जारी

नई दिल्ली। देश में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत पात्र लोगों की नागरिकता प्रक्रिया और कई राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर उठी चिंताओं पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है।

शीर्ष अदालत ने मंगलवार को तीन अलग-अलग याचिकाओं पर नोटिस जारी करते हुए केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से जवाब मांगा है।

पहली याचिका में कहा गया है कि भारत में लंबे समय से रह रहे हिंदू, बौद्ध और ईसाई समुदायों के लोग सीएए के तहत नागरिकता के हकदार हैं। इनमें से कई लोगों ने नागरिकता के लिए आवेदन भी किया है, लेकिन उनके मामलों में अब तक कोई निर्णय नहीं हुआ है। याचिकाकर्ता का दावा है कि इस देरी की वजह से अब उनके नाम वोटर लिस्ट की एसआईआर प्रक्रिया के दौरान शामिल न हो पाने का खतरा बढ़ गया है। इसी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

दूसरी याचिका भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) आजाद ट्रस्ट ने दायर की है। इसमें कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में चल रही एसआईआर प्रक्रिया के लिए दिया गया 4 हफ्ते का समय प्रशासनिक रूप से बिल्कुल अपर्याप्त है। याचिका में तर्क दिया गया है कि यूपी में 15.35 करोड़ मतदाता हैं। इतने बड़े राज्य में एसआईआर प्रक्रिया को महज चार सप्ताह में पूरा करना असंभव है। कम समय की वजह से बड़े पैमाने पर वैध मतदाताओं के नाम कटने का खतरा पैदा हो गया है।

ट्रस्ट ने यह भी बताया कि उसने पहले चुनाव आयोग को समय बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद ही सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। अब इस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। इस याचिका पर अगली सुनवाई 16 दिसंबर को होगी।

तीसरा मामला असम से जुड़ा है। यहां एसआईआर की बजाय केवल स्पेशल रिवीजन (एसआर) कराने के फैसले को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि असम जैसे संवेदनशील राज्य में एसआईआर की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है और इसे एसआर से बदलना अनेक विसंगतियों को जन्म देगा। इस याचिका पर भी सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। इस मामले में भी 16 दिसंबर को अगली सुनवाई होगी।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें