सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में परिसीमन की मांग वाली याचिका खारिज की, 2026 से पहले नहीं होगा कोई बदलाव

सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में परिसीमन की मांग वाली याचिका खारिज की, 2026 से पहले नहीं होगा कोई बदलाव
नई दिल्ली, 26 जुलाई 2025 — सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक अहम फैसले में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में विधानसभा क्षेत्रों के शीघ्र परिसीमन की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। यह याचिका आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 की धारा 26 के आधार पर दायर की गई थी, जिसमें दोनों राज्यों में विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने की मांग की गई थी। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 170(3) का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि देश में किसी भी राज्य में विधानसभा परिसीमन की प्रक्रिया अब 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के आधार पर ही शुरू की जा सकती है।
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा दी गई दलीलें संवैधानिक व्यवस्था के विरुद्ध हैं और इससे संघीय ढांचे में असंतुलन उत्पन्न हो सकता है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि धारा 26, जो आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम के तहत है, वह अपने आप में परिसीमन को अनिवार्य नहीं बनाती, बल्कि वह केवल एक प्रावधान है जो संविधान के मौलिक प्रावधानों के अधीन है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर में हाल ही में किए गए परिसीमन को उदाहरण के तौर पर नहीं देखा जा सकता, क्योंकि वह केंद्र शासित प्रदेश है और उस पर अनुच्छेद 239A जैसे विशेष प्रावधान लागू होते हैं, जो राज्यों पर लागू नहीं होते।
इस फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना को अब परिसीमन के लिए कम से कम वर्ष 2026 तक इंतजार करना होगा, जब नई जनगणना के आंकड़े उपलब्ध होंगे। इससे पहले परिसीमन की कोई संभावना नहीं है, चाहे राजनीतिक परिस्थितियां कुछ भी हों। यह निर्णय न केवल संवैधानिक अनुशासन को बनाए रखने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, बल्कि इससे अन्य राज्यों में भी समान मांगों को लेकर संभावित राजनीतिक दबाव को रोकने में मदद मिलेगी।
कुल मिलाकर, यह फैसला भारतीय संघीय ढांचे, संवैधानिक प्राथमिकताओं और जनप्रतिनिधित्व की निष्पक्षता को बनाए रखने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय आने वाले वर्षों में भारत के राजनीतिक भूगोल को प्रभावित करने वाले निर्णयों की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।





