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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:18 · नई दिल्ली संस्करण

दुमका सीट पर मजबूत चेहरा हेमंत, कल्पना के बजाय नलिन सोरेन पर दांव क्यों खेल रही है झामुमो

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
दुमका सीट  पर मजबूत चेहरा हेमंत, कल्पना के बजाय नलिन सोरेन पर दांव क्यों खेल रही है झामुमो

दुमका सीट पर मजबूत चेहरा हेमंत, कल्पना के बजाय नलिन सोरेन पर दांव क्यों खेल रही है झामुमो

रांची: इस बार लोकसभा चुनाव में झारखंड काहॉट सीट दुमका बन गया है। यहां से गुरुजी की बहू सीता सोरेन भाजपा की उम्मीदवार है। वही झामुमो ने नलिन सोरेन पर दांव खेला है। अब सवाल है कि दुमका जैसे हाईप्रोफाइल सीट पर नलीन सोरेन जैसे अनजाने चेहरे पर दांव लगाने का कारण क्या है? जबकि इसके पहले तक पूर्व सीएम हेमंत और कल्पना सोरेन को अखाड़े में उतरने की चर्चा हो रही थी, सवाल यह भी है कि क्या नलीन सोरेन सीता सोरेन को इस सियासी अखाड़े में पटकनी देने की स्थिति में है।दरअसल सीता सोरेन के सामने झामुमो अपना सबसे मजबूत चेहरा कल्पना सोरेन या पूर्व सीएम हेमंत को अखाड़े में उतार कर इसे प्रतिष्ठा का विषय नहीं बनाना चाहता है ।क्योंकि यदि इस सियासी संघर्ष में कल्पना सोरेन या पूर्व सीएम हेमंत की हार होती तो यह अब तक का सबसे बड़ा उलटफेर होता, और यदि यही हार सीता सोरेन के हिस्से आती तो इसे महज एक सामान्य हार मानी जाती।सीता सोरेन और भाजपा के सामने यह राग अलापने ने अवसर होता कि चूंकि यह सियासी शिकस्त उन्हें कल्पना सोरेन या हेमंत के हाथों हुई है, इसलिए यह हार भी उनकी जीत से बड़ा है। झामुमो हार में जीत वाली इस कहानी को आगे बढ़ने देना नहीं चाहती थी। दावा तो यह भी किया जाता है कि झामुमो की ओर से स्टीफन मरांडी से लेकर हेमलाल मुर्मू को भी अखाड़े में उतारने की कोशिश की गयी थी।लेकिन सोरेन परिवार की इस बड़ी बहु के सामने ये सियासी सुरमें मैदान में उतरने को तैयार नहीं थें, क्योंकि उनके दिल में इस पाला बदल के बावजूद अभी भी गुरुजी की इस बड़ी बहु के प्रति पूरा सम्मान है। दुमका लोकसभा में विधान सभा की कुल छह सीटें है। जिसमें शिकारीपाड़ा विधान सभा पर झामुमो (नलीन सोरेन), नाला- झामुमो (रवीन्द्र नाथ महतो), जामताड़ा-कांग्रेस (इरफान अंसारी), दुमका- झामुमो (बसंत सोरेन), जामा भाजपा (सीता सोरेन) और सारथ पर भाजपा (रणधीर कुमार सिंह) का कब्जा है। यानि कुल छह विधान सभाओं में तीन पर झाममो, एक पर कांग्रेस और दो पर भाजपा का कब्जा है, लेकिन सीता सोरेन ने यह सीट झामुमो के टिकट पर ही जीता था, इस प्रकार कुल पांच सीटों पर झामुमो कांग्रेस का कब्जा है। जहां सीता सोरेन 2009 से लगातार जामा से जीत दर्ज कर रही है, वहीं नलीन सोरेन कुल सात बार शिकारी पाड़ा में अपना झंडा गाड़े चुके हैं।

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