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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:41 · नई दिल्ली संस्करण

शहबाज शरीफ शासन और सुधारों की चुनौतियों से निपटने में नाकाम: रिपोर्ट

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार शासन और सुधारों से जुड़ी अहम चुनौतियों से निपटने के लिए कोई स्पष्ट रोडमैप तैयार करने में विफल रही है। एक ताज़ा रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, आईएमएफ के 7 अरब डॉलर के ऋण कार्यक्रम के तहत अर्थव्यवस्था को स्थिर करने की कोशिश में सरकार ने देश की गरीब आबादी के कल्याण की अनदेखी की है।

इस्लामाबाद स्थित वरिष्ठ पत्रकार फरहान बुख़ारी ने पाकिस्तानी अखबार द न्यूज़ इंटरनेशनल में लिखा, “जब देश की करीब 40 से 45 फीसदी आबादी गरीबी रेखा के नीचे जी रही हो, तो बेहतर भविष्य की ओर बढ़ने की उम्मीद एक दूर का सपना बन जाती है। पाकिस्तान ने अपने नागरिकों को स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने में विफलता दिखाई है।”

रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में लगातार आ रही बाढ़ ने सरकार की कमजोर तैयारियों और तात्कालिक सुधार लागू करने की अक्षमता को उजागर कर दिया है। इससे केंद्रीय और प्रांतीय स्तर पर जारी यथास्थिति सुधारों की गति और धीमी कर रही है।

बुख़ारी के मुताबिक, “जलवायु परिवर्तन से जुड़े घटनाक्रम हर साल भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। महंगी होती ईंधन लागत के कारण ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में लोग पेड़ों की कटाई कर लकड़ी जलाने पर मजबूर हैं। इससे वनों की कटाई तेज हुई है और पाकिस्तान का पर्यावरणीय संकट और गहरा गया है।”

उन्होंने यह भी लिखा कि गरीबी बढ़ने के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं की गुणवत्ता में गिरावट जारी है। कृषि क्षेत्र के लिए प्रभावी नीतियों की कमी से खाद्य सुरक्षा का संकट और गहराया है।

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि मौजूदा आपातकालीन हालात में पंजाब सरकार जैसी प्रांतीय सरकारों को फिजूलखर्ची वाले प्रोजेक्ट रोकने चाहिए। बुखारी ने लिखा, “हाई-स्पीड ट्रेन और मोटरवे जैसे प्रोजेक्ट जमीनी हकीकत और गरीब जनता की समस्याओं से पूर्णत: कटे हुए लगते हैं। इनकी बजाय सरकार को खाद्य असुरक्षा और गरीबी जैसी बुनियादी चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।”

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