महंगाई का नया झटका: इस जगह अचानक बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, सरकार के फैसले से मचा हाहाकार

भारत का पड़ोसी देश पाकिस्तान बिगड़ते हालात का सामना कर रहा है। हर गुज़रते दिन के साथ, वहाँ की जनता महंगाई की भारी मार झेल रही है। खासकर, सरकार के "फ्यूल बम" (ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी) की वजह से लोगों की जेब पर बोझ लगातार बढ़ रहा है। हम पाकिस्तान की बात कर रहे हैं, जहाँ मंगलवार को एक बार फिर पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें बढ़ाई गईं। शहबाज़ शरीफ़ सरकार द्वारा की गई इस भारी बढ़ोतरी के बाद, अब 1 लीटर पेट्रोल की कीमत 380 रुपये के पार चली गई है, जबकि डीज़ल की कीमत 410 रुपये प्रति लीटर के करीब पहुँच गई है।
मंगलवार को पाकिस्तान में शहबाज़ शरीफ़ सरकार ने एक बार फिर जनता पर महंगाई का बम गिराया। देश में पेट्रोल की कीमत 4.42 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर बढ़ाई गई है, जिसके बाद अब लोगों को 1 लीटर पेट्रोल के लिए 375.82 रुपये की जगह 380.24 रुपये खर्च करने होंगे। वहीं, हाई-स्पीड डीज़ल की कीमत में 6.10 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है, जिससे 1 लीटर हाई-स्पीड डीज़ल का दाम 403.32 रुपये से बढ़कर 409.42 रुपये प्रति लीटर हो गया है। पेट्रोल और डीज़ल की ये नई कीमतें 15 सितंबर से लागू हो गई हैं।
पाकिस्तान की ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी (OGRA) की समीक्षा के बाद, ऊर्जा मंत्रालय (पेट्रोलियम डिवीजन) ने पेट्रोल और डीज़ल की नई कीमतें घोषित कीं। गौरतलब है कि सरकार ने इस महीने लगातार छठी बार पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें बढ़ाई हैं। शहबाज़ शरीफ़ सरकार अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और लागत से जुड़े अन्य कारकों के आधार पर ईंधन की कीमतों की समीक्षा करती है और नई दरें जारी करती है। गौरतलब है कि पिछले साल 17 जुलाई को सरकार ने कीमतों के निर्धारण का एक नया तरीका घोषित किया था, जिसके तहत पाकिस्तान में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में रोज़ाना बदलाव किया जाता है।
पहले पाकिस्तान में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें हर पंद्रह दिन में बदलती थीं, फिर इसे साप्ताहिक किया गया और अब ये कीमतें रोज़ाना बदली जाती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच, शहबाज़ शरीफ़ सरकार तेज़ी से पेट्रोल और डीज़ल के दाम बढ़ा रही है, जिससे जनता पर बोझ बढ़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी जारी है और इसका सबसे ज़्यादा असर पाकिस्तान जैसे देशों पर पड़ रहा है जो तेल आयात पर निर्भर हैं। तेल महंगा होने के कारण न सिर्फ़ पेट्रोल और डीज़ल महंगे हो रहे हैं, बल्कि ज़रूरी चीज़ों के भी महंगे होने का ख़तरा बढ़ रहा है।





