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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:37 · नई दिल्ली संस्करण

वीवीपीएटी पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, ईवीएम के वीवीपीएटी से शत-प्रतिशत मिलान की मांग खारिज

राष्ट्रीय सागर डेस्क1 मिनट का पठन

नई

दिल्ली, । सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम के वीवीपीएटी से

शत-प्रतिशत मिलान की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस संजीव खन्ना

और जस्टिस दीपांकर दत्ता ने दो अलग-अलग फैसले लिखे हैं लेकिन दोनों में

सहमति है।

सुप्रीम कोर्ट ने दो दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पहला ये

कि सिंबल लोडिंग प्रक्रिया खत्म होने के बाद सिंबल लोडिंग यूनिट को सील

किया जाए। सिंबल लोडिंग यूनिट को 45 दिनों तक संरक्षित कर रखा जाए। दूसरा

ये कि चुनाव परिणाम की घोषणा होने के बाद दूसरे और तीसरे नंबर के उम्मीदवार

के आग्रह पर इंजीनियर्स की टीम माइक्रो कंट्रोलर की मेमोरी की जांच करेगी।

दूसरे और तीसरे नंबर के उम्मीदवार चुनाव परिणाम की घोषणा के बाद सात दिनों

के अंदर माइक्रो कंट्रोलर की मेमोरी की जांच के लिए आग्रह कर सकेंगे।

माइक्रो कंट्रोलर की मेमोरी की जांच का खर्च जांच का आग्रह करने वाले

उम्मीदवार वहन करेंगे। अगर माइक्रो कंट्रोलर की मेमोरी की जांच में ये पाया

जाता है कि ईवीएम में छेड़छाड़ की गई है तो जांच का खर्च लौटा दिया जाएगा।

कोर्ट

ने निर्वाचन आयोग को इलेक्ट्रॉनिक मशीन के जरिये पेपर पर्ची के वोटों की

गिनती के सुझाव का परीक्षण करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने

निर्वाचन आयोग को हर पार्टी के सिंबल के लिए बार कोड का इस्तेमाल करने के

सुझाव का भी परीक्षण करने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने 24 अप्रैल को

निर्वाचन आयोग ईवीएम की कार्यप्रणाली पर स्पष्टीकरण मांगे थे जिसके बाद

फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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