छह साल बाद पटना में ताकत दिखा रहा राजद -तेजस्वी के सामने 2017 का रिकॉर्ड तोड़ने की चुनौती

छह साल बाद पटना में ताकत दिखा रहा राजद
-तेजस्वी के सामने 2017 का रिकॉर्ड तोड़ने की चुनौती
पटना। अगस्त 2017 में बारिश से पूरा बिहार भीग रहा था पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में लालू यादव की राजद बैनर तले देश भर के कई विपक्षी नेता मंच पर जुटे। ऊपर आसमान पर बादल उमड़ रहे थे और नीचे गांधी मैदान में लाखों की भीड़ उमड़ी थी। आयोजन के बाद राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के पूर्व उप मुख्यमंत्री पुत्र तेजस्वी यादव ने कहा कि रैली में 25 लाख से अधिक लोग जुटे शायद लालू प्रसाद को बेटे की यह अतिशयोक्ति कुछ कम लगी तो उन्होंने कहा कि रैली में 30 लाख लोगों का जन सैलाब उमड़ा था।हालांकि भीड़ कितनी जुटी इसका कोई सीधा आकलन नहीं रहा. 2017 में हुए उस 'भाजपा भगाओ, देश बचाओ' रैली के छह वर्ष बाद अब 3 मार्च को जन विश्वास महारैली हो रही है। संयोग से 2017 की तरह आज भी बारिश की बूंदें टिपटिप कर रही हैं पिछले छह वर्षों में बिहार सहित देश की सियासत में कई बदलाव और उतार चढ़ाव देखे गए।इन सबके बीच अब 2024 का लोकसभा चुनाव सिर पर है और जन विश्वास महारैली राजद की ताकत के आकलन का बड़ा पैमाने भी होने जा रहा है। विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया की ताकत भी आज जन विश्वास महारैली में दिखेगी.।जून 2023 में एकजुट हुए इंडिया की यह पहली रैली है जिसमें एक साथ विपक्ष के कई दिग्गज एक मंच पर दिखेंगे। लालू यादव और तेजस्वी यादव के साथ ही राजद की जनविश्वास रैली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के शामिल होने को लेकर चल रहा संस्पेंस भी खत्म हो गया है। अब यह कंफर्म हो गया है कि महारैली में राहुल गांधी शामिल होंगे। वहीं उनके साथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राजस्थान से राज्यसभा सांसद केसी वेणुगोपाल भी पटना पहुंचेगे। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश सिंह ने तीनों नेताओं के पटना आने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि कल दोपहर साढ़े बारह बजे उनकी फ्लाइट पटना पहुंचेगी। जहां से वह सीधे गांधी मैदान जाएंगे। महारैली में यूपी के पूर्व सीएम व सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी शामिल होंगे। पार्टी की तरफ से उनके पटना आने का पूरा कार्यक्रम भी जारी किया गया है। इसके अलावा वामपंथी दलों के कई नेता भी मंच पर होंगे। ऐसे में पटना में छह साल बाद ताकत दिखा रहे राजद और तेजस्वी यादव के सामने 2017 का रिकॉर्ड तोड़ने की चुनौती भी है। जन विश्वास महारैली में पहली बार मुख्य चेहरे के तौर पर राजद ने लालू यादव के बदले तेजस्वी यादव के चेहरे को आगे किया है। वर्ष 2015 में बिहार की सियासत में प्रवेश करने वाले तेजस्वी यादव अब राजद में लालू यादव के उत्तराधिकारी के तौर पर खुद को स्थापित कर चुके हैं, 3 मार्च की जन विश्वास महारैली में पटना की सडकों पर दिख रहा नजारा कुछ वैसा ही है। ऐसे में वर्ष 2017 रैली के बाद तो लालू यादव और तेजस्वी ने भीड़ को लेकर बड़ा दावा किया था. अब तेजस्वी के चेहरे के सहारे हो रही जन विश्वास रैली में वैसी ही भीड़ उमड़ती है या नहीं, यह तेजस्वी यादव के लिए बड़ी अग्निपरीक्षा की भांति है।





