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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:23 · नई दिल्ली संस्करण

ऊंटों की घटती संख्या पर हाईकोर्ट ने जताई चिंता

राष्ट्रीय सागर डेस्क1 मिनट का पठन
ऊंटों की घटती संख्या पर हाईकोर्ट ने जताई चिंता

जयपुर,। राजस्थान उच्च न्यायालय ने ऊंटों की घटती संख्या पर चिंता जाहिर की है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऊंटों की घटती संख्या को लेकर सरकार गंभीर नहीं है, अदालती आदेश के बावजूद पैरवी के लिए महाधिवक्ता नहीं आ रहे। कोर्ट ने निर्देश दिया कि सरकार 27 मार्च को ऊंटों की घटती संख्या और उसके संरक्षण के प्रयासों के बारे में स्थिति स्पष्ट करे।

न्यायाधीश पुष्पेन्द्र सिंह भाटी व न्यायाधीश विनीत कुमार माथुर की खंडपीठ ने ऊंटों की घटती संख्या के बारे में स्वप्रेरणा से दर्ज याचिका पर यह आदेश दिया।

कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जाहिर की कि कानून में संशोधन के बाद ऊंटों की संख्या में कमी आई है। न्यायमित्र अधिवक्ता प्रतीक कासलीवाल ने कहा कि ऊंट लगातार घट रहे हैं। अदालती आदेश के बावजूद न तो महाधिवक्ता पैरवी के लिए आ रहे हैं और न ही इस ओर सरकार का ध्यान है। ऊंटों की पिछले कुछ साल से तो गणना ही नहीं हुई। कानून में सरकार ने कलक्टर को नोडल एजेंसी बना रखा है, ऐसे में कोई ऊंटों को बाहर चराने के लिए भी ले जाए तो अनुमति लेना मुश्किल है। वर्ष 2004 में प्रदेश में साढ़े सात लाख ऊंट थे। वर्ष 2015 में जब कानून बना तो ऊंटों की संख्या घटकर 3.26 लाख रह गई और इसके इसके चार साल बाद यह और घटकर 2.13 लाख रह गई। वर्ष 2021 में यह संख्या करीब डेढ़ लाख रह गई। ऊंटों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध के कारण पशु मेलों में इनकी बिक्री बिल्कुल बंद हो गई। ऐसे में ऊंट पालक इसे पालने की रूचि कम दिखा रहे हैं।

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