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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:20 · नई दिल्ली संस्करण

भागलपुर में गंगा का बढ़ा जलस्तर बना आफत, बह गए कई आशियाने; बाढ़ पीड़ितों को अब खाने के भी लाले

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
भागलपुर में गंगा का बढ़ा जलस्तर बना आफत, बह गए कई आशियाने; बाढ़ पीड़ितों को अब खाने के भी लाले

भागलपुर। जिले में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से बाढ़ की स्थिति अत्यंत विकराल हो चुकी है। नदी के किनारे बसे दियारा इलाकों में बाढ़ का पानी पूरी तरह फैल जाने के बाद, हजारों जिंदगियां तबाही के मुहाने पर खड़ी हैं। अपने ही घर में बेगाने हो चुके लोग भारी मन से अपना आशियाना छोड़कर सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं।

नाथनगर प्रखंड के रतीपुर, बैरिया शंकरपुर, अजमेरीपुर, रसीदपुर और श्रीरामपुर समेत कई गांव पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। इन गांवों की गलियां, जहां कभी बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, अब वहां सिर्फ और सिर्फ पानी का सन्नाटा पसरा हुआ है। गांवों में पानी घुसने के बाद बेघर हुए परिवारों ने रविंद्र भवन और टिल्हा कोठी जैसे ऊंचे सरकारी भवनों में शरण ली है। लेकिन राहत की तलाश में पहुंचे इन विस्थापितों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। विस्थापित परिवारों के सामने सिर छुपाने के बाद अब रहने, शुद्ध पीने का पानी, खाने और शौचालय जैसी बुनियादी जरूरतों का भीषण संकट खड़ा हो गया है।

कई मजबूर परिवार ऐसे भी हैं जिन्हें भवनों के भीतर जगह नहीं मिली। वे सड़कों के किनारे या खुले मैदानों में तिरपाल तानकर अपना अस्थायी आशियाना बनाने में जुटे हैं। इन अस्थायी तंबुओं में भूख से बिलखते छोटे-छोटे बच्चे और बेबस माता-पिता की तस्वीरें किसी का भी दिल दहलाने के लिए काफी हैं। बाढ़ पीड़ितों की इस त्रासदी में केवल इंसान ही नहीं, बल्कि बेजुबान पशु भी पिस रहे हैं।

ग्रामीण किसी तरह अपनी जान दांव पर लगाकर अपने मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर लेकर तो आए हैं, लेकिन अब उनके सामने पशु चारे का गहरा संकट खड़ा हो गया है। चारागाह पूरी तरह पानी में डूब चुके हैं, जिससे मवेशियों को भूखा रहना पड़ रहा है। लोग अपनों के साथ-साथ इन बेजुबानों की जिंदगी बचाने की दोहरी जद्दोजहद में जुटे हैं। बाढ़ की विभीषिका झेल रहे पीड़ितों का दर्द आंसुओं के रूप में छलक रहा है।

एक बाढ़ पीड़ित ने रोते हुए कहा, गंगा मइया ने हमारा सब कुछ छीन लिया। घर डूब गया, अनाज बह गया। अब बच्चों को क्या खिलाएं और खुद कहां जाएं, कुछ समझ नहीं आ रहा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस भीषण आपदा के बावजूद अब तक उन्हें कोई पर्याप्त सरकारी सहायता नहीं मिली है। राहत सामग्री और कम्युनिटी किचन जैसी सुविधाएं अभी भी प्रभावितों की पहुंच से दूर हैं, जिससे लोगों में भारी आक्रोश है।

जैसे-जैसे गंगा का पानी नए इलाकों को अपनी चपेट में ले रहा है, जिला प्रशासन के सामने चुनौतियां पहाड़ जैसी होती जा रही हैं। हजारों की आबादी तक तुरंत सूखा राशन, साफ पानी, चिकित्सा सुविधा और पशु चारा पहुंचाना इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। देखना यह है कि प्रशासन कागजी दावों से निकलकर जमीनी स्तर पर इन बेबस लोगों के आंसू कब तक पोंछ पाता है।

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