मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:43 · नई दिल्ली संस्करण

दिल्ली के राजपथ पर गणतंत्र दिवस परेड में गूंजेगा 'वंदे मातरम्' का उद्घोष

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
दिल्ली के राजपथ पर गणतंत्र दिवस परेड में गूंजेगा 'वंदे मातरम्' का उद्घोष

नई दिल्ली। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय इस बार गणतंत्र दिवस परेड में ‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’ विषय पर अपनी विशेष झांकी प्रस्तुत करेगा।संस्कृति मंत्रालय के अनुसार यह झांकी राष्ट्रीय गीत को भारत की सभ्यतागत स्मृति, सामूहिक चेतना और सांस्कृतिक निरंतरता की एक जीवंत अभिव्यक्ति के रूप में दुनिया के सामने रखेगी। मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल ने कहा, "भारत की झांकियां केवल औपचारिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि राष्ट्र की सभ्यतागत स्मृति के चलते-फिरते अभिलेख हैं। संस्कृति गणराज्य का केवल अलंकरण मात्र नहीं, बल्कि उसकी जीवंत आत्मा है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां अन्य झांकियां उपलब्धियां दिखाती हैं, वहीं संस्कृति मंत्रालय विचारों और ऐतिहासिक अनुभवों को एक साझा दृश्य भाषा में पिरोता है।अग्रवाल ने वंदे मातरम् के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि 1875 में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत केवल एक रचना नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक शक्ति है। अरबिंदो ने भी इसे सामूहिक चेतना जगाने वाला मंत्र माना था। 'सुजलाम्-सुफलाम्' के भाव के साथ इस गीत ने राष्ट्र को 'माता' के रूप में कल्पित किया और औपनिवेशिक काल में भारतीयों के भीतर आत्मसम्मान और साहस का संचार किया।इस दौरान झांकी के अग्र भाग पर वंदे मातरम् की मूल पांडुलिपि को प्रदर्शित किया जाएगा। झांकी के साथ देश के चारों दिशाओं से आए लोक कलाकार भारत की विविधता को प्रदर्शित करेंगे।​वर्ष 2021 से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) को इस झांकी की परिकल्पना और निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने बताया कि यह झांकी किसी एक विभाग की नहीं, बल्कि पूरे देश की सामूहिक भावनाओं का प्रतिनिधित्व करती है।उन्होंने कहा, "गणतंत्र दिवस 2026 की यह प्रस्तुति स्वतंत्रता संग्राम की गूँजों को वर्तमान के दायित्वों और भविष्य की आकांक्षाओं से जोड़ने का एक प्रयास है। वंदे मातरम् अब केवल एक गीत नहीं, बल्कि सशक्त भारत की अखंडता का उद्घोष बनकर उभरेगा।"​डॉ. जोशी ने कहा कि 150 वर्षों की इस यात्रा के माध्यम से संस्कृति मंत्रालय राष्ट्रीय गीत को एकता और शाश्वत चेतना के प्रतीक के रूप में पुनः स्थापित करना चाहता है। यह झांकी देशवासियों को न केवल आजादी की याद दिलाएगी, बल्कि उसके योग्य बने रहने का आह्वान भी करेगी।

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें