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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:54 · नई दिल्ली संस्करण

खान-खनिज संशोधन विधेयक को राज्यसभा की मंजूरी, मानसून सत्र खत्म

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
खान-खनिज संशोधन विधेयक को राज्यसभा की मंजूरी, मानसून सत्र खत्म

नई दिल्ली। खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 राज्यसभा में पारित हो गया। केंद्रीय खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने विधेयक को सदन में पेश किया। विधेयक पेश किए जाने और चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्यों ने सदन में जमकर नारेबाजी की। वहीं बिल पारित होने के साथ ही मानसून सत्र का भी समापन हो गया।

वहीं चर्चा का जवाब देते हुए जी. किशन रेड्डी ने कहा कि खनिज क्षेत्र से राज्यों को मिलने वाले राजस्व में नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि तेल के क्षेत्र में भी राज्यों को मिलने वाले राजस्व में काफी वृद्धि हुई है।

रेड्डी ने कहा कि पहले राज्यों को करीब 50 प्रतिशत राजस्व मिलता था, लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार के आने के बाद राज्यों को करीब 96 प्रतिशत राजस्व मिल रहा है, जबकि केंद्र सरकार को केवल 4 प्रतिशत हिस्सा मिलता है।

केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष को राज्यों के हित की चिंता करने की जरूरत नहीं है।

मोदी सरकार राज्यों के हित के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार गरीबों, किसानों और जरूरतमंदों के लिए लगातार काम कर रही है।

जी. किशन रेड्डी ने कहा कि कराधान किसी भी क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण साधन है। यदि संसद कराधान से जुड़े प्रावधानों पर सहमति नहीं बनाएगी तो देश के खनन और खनिज क्षेत्र का विकास प्रभावित होगा।

इस विधेयक का उद्देश्य खनिज क्षेत्र का विकास करना और राज्यों के राजस्व को बढ़ाना है। उन्होंने विश्वास जताया कि विधेयक के लागू होने से राज्यों का राजस्व बढ़ेगा और खनिज क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी।

उन्होंने कहा, ''मेरा विश्वास है कि खनिज क्षेत्र के विकास से राज्यों का राजस्व बढ़ेगा और देश को इसका लाभ मिलेगा।”

इससे पहले राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदस्यों को बताया कि उन्हें संसदीय कार्य मंत्री की ओर से लोकसभा से पारित खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को विचार और पारित करने के लिए अनुरोध प्राप्त हुआ था।

इस अनुरोध में कहा गया था कि इसके लिए शून्यकाल में उठाए जाने वाले विषयों और प्रश्नकाल को स्थगित कर विधेयक को तुरंत लिया जाए।

विधेयक के महत्व और इस तथ्य को देखते हुए कि मानसून सत्र के अंतिम दिन प्रश्नकाल को स्थगित किया गया ताकि सदन विधेयक पर तत्काल विचार कर सके। वहीं पहले से सूचीबद्ध प्रश्नों के उत्तर सदन के पटल पर रखे हुए मान लिया गया।

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