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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:40 · नई दिल्ली संस्करण

जनता ने आदेश है घमंड को त्यागो और समर्पण भाव से काम करो : पायलट

राष्ट्रीय सागर डेस्क5 मिनट का पठन

दौसा, । पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कहा कि लोकसभा चुनाव

में राजस्थान में जो परिणाम आए है उसमें एक खंडित जनादेश मिला है लेकिन इस

चुनाव के परिणाम से एक संदेश गया कि दमन की, प्रतिशोध की, भेदभाव की

राजनीति अब नहीं चलेगी। अब 10 साल में घमंड और अहंकार की सरकार थी, जनता ने

आदेश दिया है कि घमंड को त्यागो और समर्पण भाव से काम करने की जरूरत है।

पायलट

मंगलवार को दौसा में पूर्व केन्द्रीय मंत्री राजेश पायलट की 24वीं

पुण्यतिथि के मौके पर भंडाना गांव के पास जयपुर-आगरा हाईवे पर उनकी स्मृति

में बने स्मारक पर पुष्पांजलि कार्यक्रम व सर्वधर्म प्रार्थना सभा के बाद

पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस चुनाव में राजस्थान की

जनता ने भाजपा को 11 जगह पराजित किया है। पायलट ने कहा कि उनके स्वर्गीय

पिता राजेश पायलट ने देशहित में कई कार्य किए। जनता के मुद्दों को उठाया और

विकास के आयाम स्थापित किए थे। ऐसे में उनके अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाने

के लिए हम सभी प्रेरणा लेकर काम कर रहे हैं।

पायलट ने कहा कि मैं

जनता का धन्यवाद देना चाहता हूं कि बहुत सारे एग्जिट पोल और कई तरह की

बातों से अलग अप्रत्याशित परिणाम आए हैं। उत्तर प्रदेश, हरियाणा और

राजस्थान जैसे राज्यों में डबल इंजन की सरकार को किसानों व नौजवानों ने

स्पष्ट संदेश दिया है। अभी गठजोड़ की सरकार बनी है क्योंकि किसी भी दल को

मैंडेट नहीं मिला है। एक खंडित जनादेश आया है, लेकिन चुनाव के परिणाम से जो

राजनीतिक संदेश आया है कि दमन, प्रतिशोध, आक्रमण व भेदभाव की राजनीति नहीं

चलेगी। पूर्व में संसद में जिस तरह 147 सांसदों को एक साथ निलंबित किया

गया, मैं समझता हूं उस प्रकार की कार्रवाई को लोगों ने पसंद नहीं किया।

उन्होंने

कहा कि निर्वाचित दो मुख्यमंत्रियों को जेल में डाला गया, कांग्रेस के

नेताओं को प्रताड़ित किया गया और अब विपक्ष की एकजुटता हुई उससे एक संदेश

जनता ने दिया है कि आने वाले समय में सबको मिलकर काम करना होगा। सरकार का

गठन कल-परसों में ही हुआ है लेकिन अभी से कई दलों में आशंकाए पैदा हुई हैं।

कोई शपथ लेने से मना कर रहा है, ऐसे में खींचतान शुरू हो गई है। अब समय

बताया कि सरकार कितनी चलती है और कितना कामयाब होती है। खंडित जनादेश आया

है और कांग्रेस का संख्याबल दोगुना हुआ है। कांग्रेस में राहुल गांधी,

मल्लिकार्जुन खड़गे और हम सबने मिलकर जो मेहनत की है उसका परिणाम आया है कि

आज कांग्रेस के 100 से ज्यादा सांसद है। पायलट ने कहा कि चुनाव से पहले

भाजपा 303 सांसद लेकर मैदान में उतरी थी, आज उनके 60-70 सांसद कम हुए हैं।

साथ ही एनडीए 400 का दावा करता था, उनके भी सांसद कम हुए है। कांग्रेस

पार्टी के लिए लोकसभा के परिणाम कुछ हद तक संतोषजनक है।

पूर्वी

राजस्थान में कांग्रेस की वापसी के सवाल पर पायलट ने कहा जो भी लोग चुनाव

जीते हैं, वह पार्टी के सिंबल पर जीतकर आए हैं। पार्टी ने उन्हें मौका दिया

था। चुनाव में जीत का श्रेय नेताओं के साथ विशेष तौर पर पार्टी

कार्यकर्ताओं को जाता है। कार्यकर्ता यदि बूथ पर मेहनत नहीं करते तो हमको

सफलता नहीं मिलती। सबके सहयोग और सामूहिक नेतृत्व की मेहनत से ही जीते हैं

और जहां हम चुनाव हारे हैं वहां अगली बार ज्यादा मेहनत करेंगे। नीट रिजल्ट

के सवाल पर पायलट ने कहा कि कई प्रकार के आरोप लग रहे हैं। सरकार में जो

स्पष्टीकरण दिया है वह बिल्कुल भी संतोषजनक नहीं है। अपने बच्चों को भविष्य

को लेकर लाखों परिवार चिंतित हैं। सरकार को बिल्कुल भी चिंता नहीं है।

पायलट

ने कहा कि कश्मीर में आतंकवादी हमले हो रहे हैं। वहीं मणिपुर हिंसा पर

उन्होंने कहा कि सरकार को बहुत पहले सचेत होना चाहिए था। देश के एक हिस्से

में अपराध किया जा रहे हैं, दुष्कर्म हो रहे हैं। जिन्हें रोकने के लिए

केंद्र सरकार में कोई ठोस कदम नहीं उठाए, जिसका सभी को दुख है। अब खुद उनके

लोग इस मुद्दे पर बोल रहे हैं तो जरूर सरकार इस पर संज्ञान लेगी। उन्होंने

किसी भी राजनेता, दल या सरकार को विनम्रता का परिचय देना चाहिए, जनता के

अरमानों को पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए।

पुष्पांजलि कार्यक्रम में पहुंचे आठ नव निर्वाचित सांसद

प्रार्थना

सभा में दौसा सांसद मुरारीलाल मीणा, बाड़मेर सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल,

टोंक सवाईमाधोपुर सांसद हरीश मीणा, झुंझुनू सांसद ब्रजेन्द्र ओला, गंगानगर

सांसद कुलदीप इंदोरा, भरतपुर सांसद संजना जाटव, चूरू सांसद राहुल कस्वां,

धौलपुर करौली सांसद भजन लाल जाटव, विधायक हरीश चौधरी, मनीष यादव, रीटा

चौधरी, पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास, ममता भूपेश, पूर्व विधायक

जीआर खटाना, ओमप्रकाश हुड़ला, परसराम मोरदिया, सुरेश मोदी, वेदप्रकाश

सोलंकी, इंद्राज गुर्जर, रामस्वरूप कसाना, नरेंद्र बुढ़ानिया, धीरज गुर्जर,

मुकेश भाकर, रामनिवास गांवडिया, अमीन खान, हेमाराम चौधरी, अनिता जाटव, ललित

यादव, विकास चौधरी, पीआर मीणा, शिवप्रकाश गुर्जर, प्रशांत बैरवा, महेंद्र

रलावता, राखी गौत्तम, दामोदर गुर्जर, रफीक मंडेलिया, सुरेश गुर्जर, रोहित

बोहरा, जाहिदा खान, रमिला खड़िया, कृष्णा पूनिया, रूबी कुन्नर, अमर सिंह

जाटव, गणेश घोघरा, अभिमन्यु पूनिया, जोगेंद्र अवाना, वाजिब अली, राकेश

पारीक, निर्मल चौधरी, अजीत सिंह महुवा, रामजीलाल ओढ़ समेत दर्जनों नेता

मौजूद रहे।

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