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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:25 · नई दिल्ली संस्करण

राजस्थान: पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों में देरी को लेकर दायर अवमानना याचिका पर टली सुनवाई

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
राजस्थान: पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों में देरी को लेकर दायर अवमानना याचिका पर टली सुनवाई

जयपुर। राजस्थान हाई कोर्ट ने सोमवार को राज्य में पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव कराने में हुई देरी को लेकर राज्य चुनाव आयोग के खिलाफ दायर अवमानना ​​याचिका पर सुनवाई टाल दी।

यह मामला जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल और जस्टिस अनिल कुमार उपमन की डिवीजन बेंच के सामने लिस्ट किया गया था, जिसे पूर्व विधायक संयम लोढ़ा, गिर्राज सिंह देवंदा और अन्य लोगों द्वारा दायर अवमानना ​​याचिका पर सुनवाई करनी थी।

हालांकि, बेंच ने सुनवाई 26 मई तक के लिए टाल दी, यह देखते हुए कि हाई कोर्ट की एक अन्य डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग द्वारा चुनाव टालने की मांग वाली याचिकाओं पर अपना फैसला पहले ही सुरक्षित रख लिया है।

पिछली सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग और राज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह को अवमानना ​​नोटिस जारी किए थे। कोर्ट ने आयोग से इस बारे में स्पष्टीकरण मांगा था कि उसने स्थानीय निकाय चुनावों के लिए मतदाता सूचियों के संशोधन का कार्यक्रम, हाई कोर्ट द्वारा पहले से तय की गई समय सीमा के बाद कैसे जारी किया।

अवमानना ​​याचिका में लोढ़ा ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार और चुनाव आयोग, दोनों ही हाई कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद जान-बूझकर चुनावों में देरी कर रहे हैं।

याचिका के अनुसार, आयोग ने स्थानीय निकाय चुनावों के लिए अंतिम मतदाता सूचियों के प्रकाशन की तारीख 22 अप्रैल तय की थी, जिससे अदालत द्वारा पहले निर्धारित 15 अप्रैल की समय सीमा के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी करना असंभव हो गया था।

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि यह न्यायिक आदेशों की जानबूझकर की गई अवहेलना थी और अदालत की अवमानना ​​के दायरे में आती है।

लोढ़ा ने आगे दावा किया कि पंचायत और शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के आयोजन में हुई अत्यधिक देरी ने पिछले डेढ़ साल में राजस्थान में एक संवैधानिक संकट पैदा कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुने हुए प्रतिनिधियों के स्थान पर नियुक्त प्रशासकों के कामकाज के कारण जनता में रोष व्याप्त है।

इससे पहले, 11 मई को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायमूर्ति संजीत पुरोहित की एक अलग डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग द्वारा चुनाव स्थगित करने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई की।

दलीलें सुनने के बाद बेंच ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

अपनी याचिका में राज्य सरकार ने अनुरोध किया कि पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव दिसंबर तक के लिए टाल दिए जाएं; देरी के कारणों के रूप में सरकार ने विभिन्न महीनों में मौजूद अलग-अलग प्रशासनिक और मौजूदा परिस्थितियों का हवाला दिया।

राज्य चुनाव आयोग ने अपनी दलील में सरकार के रुख का समर्थन किया और तर्क दिया कि ओबीसी आरक्षण का निर्धारण अंतिम रूप दिए जाने से पहले चुनाव कराना व्यावहारिक नहीं होगा।

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