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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:03 · नई दिल्ली संस्करण

राजा कृष्णमूर्ति बोले- चीन के मुकाबले भारत-अमेरिका को मजबूत करनी होगी रणनीतिक साझेदारी

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
राजा कृष्णमूर्ति बोले- चीन के मुकाबले भारत-अमेरिका को मजबूत करनी होगी रणनीतिक साझेदारी

वाशिंगटन। भारतीय अमेरिकी कांग्रेसी राजा कृष्णमूर्ति ने कहा है कि चीन की चुनौती का सामना करने के लिए भारत और अमेरिका को और ज्यादा काम करना चाहिए और उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, स्वच्छ ऊर्जा और सुरक्षा में गहरे सहयोग की अपील की है।

कृष्णमूर्ति ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस को दिए एक इंटरव्यू में कहा, ““मेरा मानना है कि भारत को, अमेरिका की तरह इस चुनौती का डटकर सामना करने के लिए आगे आना चाहिए। फिलहाल वह पर्याप्त प्रयास नहीं कर रहा है। वह इससे कहीं अधिक कर सकता है। उन्होंने चीन के साथ रणनीतिक प्रतिस्पर्धा को दोनों लोकतांत्रिक देशों के लिए एक निर्णायक परीक्षा बताया।

उन्होंने कहा, “चीन से जुड़ी चुनौती हमारे समय की सबसे बड़ी और सबसे महत्वपूर्ण चुनौती है। सवाल यह है कि क्या हम इस अवसर पर खरे उतरेंगे और एक देश के रूप में अपने सर्वश्रेष्ठ स्वरूप को सामने लाएंगे? फिलहाल हम ऐसा नहीं कर रहे हैं।

कृष्णमूर्ति ने कहा कि भारत और अमेरिका को उभरती हुई प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने फ्यूजन ऊर्जा, सौर ऊर्जा, क्वांटम प्रौद्योगिकी और एआई को सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया।

उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि प्रौद्योगिकी ही भविष्य है।

हमें भविष्य की तकनीकों पर साथ मिलकर काम करना चाहिए, चाहे वह फ्यूजन हो, सौर ऊर्जा हो, क्वांटम प्रौद्योगिकी हो, कृत्रिम बुद्धिमत्ता हो या फिर सुरक्षा से जुड़े मुद्दे हों।”

कांग्रेस सदस्य ने कहा कि सफलता के लिए दोनों देशों को अपने लोकतंत्र को और मजबूत करना होगा तथा आंतरिक विभाजनों को कम करना होगा।

हमें हरसंभव प्रयास करना चाहिए कि समाज में विभाजन कम हो और किसी भी व्यक्ति के साथ, कहीं भी, किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो। यदि हम ऐसा कर सके, तो मुझे पूरा विश्वास है कि हम सफल होंगे।

अमेरिका में चीन के कथित प्रभाव के बारे में पूछे जाने पर कृष्णमूर्ति ने कहा कि ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि बीजिंग ने वोटों की गिनती या मतों के संकलन (टैब्यूलेशन) में हस्तक्षेप किया हो।

उन्होंने कहा, “उन्होंने इस पर विचार किया था, लेकिन ऐसा किया नहीं। हालांकि, इसके बावजूद यह हमेशा चिंता का विषय बना रहता है।”

उन्होंने कहा कि चीन के प्रभाव अभियान अक्सर सूक्ष्म (सटल) तरीके से और स्थानीय स्तर पर चलाए जाते हैं। इनमें सोशल मीडिया का इस्तेमाल और जनमत को प्रभावित करने वाले लोगों (ओपिनियन मेकर्स) के विचारों को प्रभावित करने के प्रयास भी शामिल होते हैं।

कृष्णमूर्ति ने अमेरिका की चीन के मुकाबले प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को उसकी आव्रजन (इमिग्रेशन) नीति से भी जोड़ा। उन्होंने एच1बी वीजा धारकों, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर शामिल हैं, के साथ होने वाले व्यवहार की आलोचना की और उनके लिए स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) पाने की प्रक्रिया में अधिक निश्चितता और तेजी लाने की मांग की।

उन्होंने कहा, “करीब दस लाख लोग वर्षों से धैर्यपूर्वक ग्रीन कार्ड की प्रतीक्षा कर रहे हैं। हमें इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए हरसंभव प्रयास करना चाहिए, विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो दशकों से अमेरिका में रह रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता हो सकती है, लेकिन ऐसे सुधार दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों की सहमति (द्विदलीय आधार) से किए जाने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय से वीजा पर रह रहे लोग नए व्यवसाय स्थापित कर सकते हैं, रोजगार पैदा कर सकते हैं और ऐसी प्रौद्योगिकी विकसित कर सकते हैं जो अमेरिका की समृद्धि के लिए आवश्यक हैं।

कृष्णमूर्ति डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता हैं और वर्ष 2017 से इलिनॉय के 8वें कांग्रेसनल जिले का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनका जन्म नई दिल्ली में हुआ था और उनका पालन-पोषण अमेरिका में हुआ। वे चीन के साथ रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और अमेरिका की प्रौद्योगिकी नीति से जुड़े मुद्दों पर कांग्रेस की प्रमुख आवाजों में से एक माने जाते हैं।

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