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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:00 · नई दिल्ली संस्करण

राघोपुर-शंकरपुर बांध ध्वस्त, गंगा का पानी मचा सकता है 2008 जैसा कहर

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
राघोपुर-शंकरपुर बांध ध्वस्त, गंगा का पानी मचा सकता है 2008 जैसा कहर

भागलपुर।

जिले के नवगछिया अनुमंडल अंतर्गत खरीक प्रखंड के दक्षिणी क्षेत्र में बाढ़ का भीषण खतरा पैदा हो गया है।

रविवार देर रात गंगा नदी के जलस्तर में हुई अप्रत्याशित वृद्धि और तेज बहाव के कारण राघोपुर-शंकरपुर (काजीकोरैया) मुख्य जमींदारी बांध का एक बड़ा हिस्सा अचानक जमींदोज हो गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, देखते ही देखते लगभग 200 मीटर तक का तटबंध गंगा की उफनती धारा में विलीन हो गया। इस वीभत्स कटाव की चपेट में आने से जल संसाधन विभाग के कैंप कार्यालय का आधा हिस्सा भी नदी में समा गया है।

बांध टूटने की खबर फैलते ही खरीक दक्षिणी क्षेत्र के दर्जनों गांवों में हड़कंप मच गया है और ग्रामीणों के बीच वर्ष 2008 की प्रलयंकारी बाढ़ जैसी तबाही का खौफ साफ देखा जा रहा है। बांध ध्वस्त होने के बाद गंगा का पानी बड़ी तेजी से रिहायशी और कृषि इलाकों की ओर बढ़ रहा है।

खरीक प्रखंड की राघोपुर, लोकमानपुर, उस्मानपुर और तुलसीपुर जैसी निचली पंचायतों के कई गांवों पर जलमग्न होने का सीधा खतरा मंडरा रहा है। यदि पानी की रफ्तार यही रही, तो क्षेत्र की लगभग 25 हजार से अधिक की आबादी बाढ़ की चपेट में आ जाएगी।

बाढ़ के डर से ग्रामीणों ने ऊंचे स्थानों और राष्ट्रीय राजमार्ग की ओर पलायन करना शुरू कर दिया है। ग्रामीण अपने साथ अनाज, मवेशी और जरूरी सामान लेकर सुरक्षित ठिकानों की तलाश में भटक रहे हैं। इस आपदा से खरीक क्षेत्र के किसानों की रीढ़ टूट गई है।

नवगछिया और खरीक इलाके की लाइफलाइन मानी जाने वाली केले की सैकड़ों एकड़ में लगी फसल अब बाढ़ के पानी में डूबने की कगार पर है। इसके अलावा, किसानों द्वारा खून-पसीना बहाकर तैयार की गई धान, मक्का और हरी सब्जियों की फसलें पूरी तरह बर्बाद होने का अंदेशा है, जिससे किसानों को करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

घटना की सूचना मिलते ही जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता, कार्यपालक अभियंता और फ्लड फाइटिंग टीम के अध्यक्ष भारी बल के साथ मौके पर कैंप कर रहे हैं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सैकड़ों मजदूरों को लगाया गया है। नदी की तेज धारा को मोड़ने और बांध के शेष हिस्से को बचाने के लिए बड़े पैमाने पर एनसी बैग (बालू भरी बोरियां) और पेड़ों की बड़ी टहनियां गिराई जा रही हैं।

मौके पर पहुंचे खरीक के अंचलाधिकारी और प्रखंड विकास पदाधिकारी ने स्थिति का जायजा लिया और ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि प्रशासन जान-माल की रक्षा के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। हालांकि, उफनती गंगा के सामने प्रशासनिक दावे फिलहाल बौने साबित होते दिख रहे हैं और ग्रामीण बेहद डरे हुए हैं।

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