आर. पी. मंडल का बिहार मॉडल: चुनाव, चुनौती और जनसरोकार की बेबाक व्याख्या

आर. पी. मंडल का बिहार मॉडल: चुनाव, चुनौती और जनसरोकार की बेबाक व्याख्या
"2025 के चुनाव की रणभेरी बज चुकी है, और बिहार का जनमानस एक नई दिशा की ओर देख रहा है। ऐसे समय में हमारे संवाददाता चन्दन कुमार झा ने बातचीत की बिहार के झंझारपुर से सांसद, जदयू नेता और जनहित के मुद्दों पर मुखर आवाज़ आर. पी. मंडल से। इस विशेष इंटरव्यू में उन्होंने न केवल अपने क्षेत्र की समस्याओं और विकास योजनाओं पर खुलकर बात की, बल्कि विपक्ष, जातिवाद, इलेक्शन कमीशन, युवा नेतृत्व और लोकतंत्र की संवेदनशीलता पर भी दो टूक राय रखी। प्रस्तुत है एक विस्तृत, बेबाक और ईमानदार बातचीत का सम्पूर्ण, लंबा और विश्लेषणात्मक संस्करण:"
🔴 चन्दन कुमार झा (संवाददाता, राष्ट्रीय सागर):
सर, सबसे पहला सवाल बिहार में चल रहे चुनाव आयोग के सर्वे को लेकर है, जिसे लेकर विपक्ष ने काफी हंगामा किया। सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल भी डाली गई, लेकिन अदालत ने इसे वैध और संवैधानिक करार दिया। इसके बावजूद विरोध क्यों हो रहा है?
🔵 आर. पी. मंडल (सांसद, जदयू):
बिलकुल, यह सवाल बहुत महत्वपूर्ण और मौलिक है। देखिए, लोकतंत्र का आधार है 'स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव'। और जब मतदाता ही वास्तविक न रह जाएं, जब वोट डालने वाला नागरिक ही संदेह के घेरे में आ जाए, तो पूरी व्यवस्था पर सवाल उठता है। बिहार जैसे सीमावर्ती राज्य में जहां नेपाल, बांग्लादेश की सीमाएं सटी हुई हैं, वहां वर्षों से अवैध घुसपैठ एक बड़ी चुनौती रही है। खासकर अररिया, किशनगंज, मधुबनी जैसे जिलों में यह स्थिति और भी गंभीर है। यहां लाखों की संख्या में लोग अवैध रूप से आकर बस गए हैं, और फर्जी दस्तावेजों के जरिए भारतीय नागरिक बन गए। इन फर्जी वोटर्स की मौजूदगी से लोकतंत्र की आत्मा घायल हो रही है।
चुनाव आयोग ने जो सर्वे शुरू किया है, वह न केवल समय की मांग है, बल्कि संवैधानिक दायित्व भी है। सुप्रीम कोर्ट ने भी यह मान्यता दी है कि यह प्रक्रिया वैध है। अब जब न्यायपालिका, कार्यपालिका और आम जनता – तीनों इस पहल का स्वागत कर रहे हैं, तो विपक्ष का विरोध केवल इस बात का सूचक है कि उनकी राजनीतिक बुनियाद फर्जी वोटर्स पर टिकी है। जब यह आधार खिसकेगा, तो सत्ता की लालसा रखने वालों की बेचैनी बढ़ेगी ही। यही कारण है कि वे लोकतंत्र की मजबूती को भी संदेह के घेरे में ला रहे हैं।
🔴 चन्दन कुमार झा (संवाददाता, राष्ट्रीय सागर): विपक्ष का आरोप है कि सरकार दलितों, अल्पसंख्यकों और वंचित वर्गों के वोट काट रही है।
🔵 आर. पी. मंडल (सांसद, जदयू):
यह पूरी तरह से एक झूठा, भ्रामक और गुमराह करने वाला नैरेटिव है, जिसे विपक्ष ने जनता की सहानुभूति पाने के लिए गढ़ा है। अगर सरकार वंचित विरोधी होती, तो क्या गरीबों को मिलने वाली योजनाएं – जैसे उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त गैस कनेक्शन, आयुष्मान भारत के तहत ₹5 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा, या पीएम आवास योजना – सभी वर्गों तक पहुंचतीं? क्या वृद्धा पेंशन ₹400 से बढ़ाकर ₹1100 होती? क्या हर जिले में दलित छात्रावास बन रहे होते? यह सरकार 'सबका साथ, सबका विकास' की नीति पर चल रही है, न कि किसी जाति या समुदाय के खिलाफ।
हकीकत यह है कि विपक्ष अपनी जमीन खो चुका है। उनके पास अब कोई मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वे जाति, धर्म और वर्ग के नाम पर भावनात्मक खेल खेलते हैं। लेकिन आज की जनता मोबाइल पर हर चीज देखती, पढ़ती और समझती है। अब पुराने जमाने के झूठ नहीं चल सकते।
🔴 चन्दन कुमार झा (संवाददाता, राष्ट्रीय सागर): आप कहते हैं कि यह सर्वे सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रहना चाहिए। बाकी राज्यों में इसकी क्या प्रासंगिकता है?
🔵 आर. पी. मंडल (सांसद, जदयू):
बिलकुल, मेरा स्पष्ट मत है कि यह सर्वे केवल बिहार तक सीमित नहीं रहना चाहिए। देश के अन्य हिस्सों में भी अवैध घुसपैठ एक बड़ा खतरा बन चुकी है। मणिपुर, मिजोरम, असम, मेघालय, त्रिपुरा – ये सभी राज्य अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से सटे हुए हैं और वहां रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। दिल्ली, कोलकाता, मुंबई जैसे महानगरों में भी फर्जी आधार और मतदाता पहचान पत्र बनवाकर ये लोग न केवल वोट डालते हैं बल्कि अपराध और आतंक की जड़ें भी मजबूत करते हैं।
यह स्थिति केवल लोकतंत्र के लिए ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है। इसलिए अगर हम वास्तव में राष्ट्र की अखंडता और जनतांत्रिक संरचना को बचाना चाहते हैं, तो यह सर्वे पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए। यह केवल जाँच नहीं है – यह राष्ट्र निर्माण की बुनियाद को मजबूत करने का उपाय है।
🔴 चन्दन कुमार झा (संवाददाता, राष्ट्रीय सागर): हाल में IND गठबंधन के बिहार बंद में पप्पू यादव और कन्हैया कुमार को मंच पर नहीं चढ़ने दिया गया। आप इसे किस दृष्टिकोण से देखते हैं?
🔵 आर. पी. मंडल (सांसद, जदयू):
यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण, अलोकतांत्रिक और चिंताजनक घटना थी। पप्पू यादव जी का राजनीति में लंबा अनुभव रहा है। उन्होंने कई बार जनसेवा के कार्य किए हैं, आपदाओं में मदद की है, जनता के साथ खड़े हुए हैं। वहीं कन्हैया कुमार – भले ही वैचारिक रूप से हम अलग हों – लेकिन वह एक शिक्षित, मुखर और युवाओं के बीच लोकप्रिय चेहरा हैं। उन्हें मंच पर जगह न देना विपक्षी गठबंधन की अंदरूनी टूट और नेतृत्व के संकट को उजागर करता है।
यह इस बात का प्रमाण है कि उनके यहां नए नेतृत्व को स्वीकारने की जगह नहीं है। वे युवाओं को आगे बढ़ते नहीं देख सकते। राजनीति में जगह बनाई जाती है – छीनी नहीं जाती। अगर पप्पू यादव और कन्हैया जैसे जनप्रिय नेताओं को अपमानित किया जाएगा, तो जनता इसे देख रही है और समय आने पर इसका जवाब देगी।
🔴 चन्दन कुमार झा (संवाददाता, राष्ट्रीय सागर): एनडीए बनाम INDI गठबंधन – किस प्रकार की राजनीति कर रहे हैं दोनों?
🔵 आर. पी. मंडल (सांसद, जदयू):
यह एक मौलिक अंतर है। एनडीए राष्ट्र निर्माण, विकास, सामाजिक समरसता और सबको साथ लेकर चलने की राजनीति करती है। हमारे लिए 'विकास' नारा नहीं, नीति है। हमने जाति-धर्म की सीमाओं से ऊपर उठकर काम किया है। मैं खुद इसका उदाहरण हूं – मेरी जाति के वोट लगभग डेढ़ लाख हैं, लेकिन मुझे तीन लाख तेईस हजार वोट मिले, इसका अर्थ है कि मुझे हर वर्ग और समुदाय से वोट मिला। यह हमारी राजनीति की सच्चाई है।
दूसरी ओर, IND गठबंधन केवल जातीय समीकरणों और वोट बैंक की राजनीति करता है। ये लोग समाज को बांटते हैं, भ्रम फैलाते हैं और पुराने घिसे-पिटे नारों से जनता को बहकाने की कोशिश करते हैं। लेकिन जनता अब समझ चुकी है कि किसने काम किया और कौन सिर्फ भाषण देता है। राजनीति अब मुद्दों की होनी चाहिए – बिजली, पानी, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य – और यही हमारी प्राथमिकता है।
🔴 चन्दन कुमार झा (संवाददाता, राष्ट्रीय सागर): आपकी पार्टी के पूर्व नेता मंगनी लाल मंडल ने जातीय बयान दिया – ‘भूरा बाल साफ करो’। इस पर आपकी प्रतिक्रिया?
🔵 आर. पी. मंडल (सांसद, जदयू):
मैं इस बयान की कड़ी निंदा करता हूं। यह बयान न केवल अपमानजनक है, बल्कि सामाजिक सौहार्द के खिलाफ भी है। मंगनी लाल मंडल जी को हमने दो बार सांसद बनाया, संगठन में सम्मानित पद दिए। लेकिन अगर कोई नेता समाज में जहर घोलने वाली भाषा का प्रयोग करता है, तो वह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ जाता है। ऐसे वक्तव्यों का न जनता में समर्थन है, न पार्टी में स्थान।
आज का भारत जागरूक है। लोग जाति और धर्म की सीमाओं से ऊपर उठकर राष्ट्र निर्माण की बात करते हैं। इसलिए ऐसी बयानबाज़ी करने वालों को जनता खुद जवाब देगी। हमारा उद्देश्य समाज को जोड़ना है, तोड़ना नहीं। यही भाजपा और जदयू की राजनीति का मूलभूत अंतर है – हम 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' में विश्वास रखते हैं।
🔴 चन्दन कुमार झा (संवाददाता, राष्ट्रीय सागर): विकास की दृष्टि से आपके संसदीय क्षेत्र में क्या-क्या काम हुए हैं?
🔵 आर. पी. मंडल (सांसद, जदयू):
झंझारपुर और आसपास के क्षेत्रों में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं। उदाहरण के तौर पर:
₹9000 करोड़ की लागत से पश्चिमी कोसी नहर परियोजना पर कार्य आरंभ हुआ है, जिससे लाखों किसानों को सिंचाई सुविधा मिलेगी और जल संकट से राहत मिलेगी।
झंझारपुर में अत्याधुनिक मेडिकल कॉलेज का निर्माण हो चुका है – जुलाई से कक्षाएं शुरू हो जाएंगी। यह चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा की दिशा में क्रांतिकारी कदम है।
दरभंगा में एम्स की स्थापना हो रही है, जिससे उत्तर बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई ऊंचाई मिलेगी।
मां जानकी के जन्मस्थल जनकपुर को रामायण सर्किट से जोड़ने के लिए सड़क और पर्यटन अधोसंरचना विकसित की जा रही है।
मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विशेष मखाना बोर्ड का गठन हुआ है, जिसमें ₹10,000 करोड़ का निवेश सुनिश्चित किया गया है।
छह नए एयरपोर्ट की घोषणा – जिससे न सिर्फ कनेक्टिविटी बेहतर होगी, बल्कि रोजगार भी सृजित होंगे।
100 यूनिट मुफ्त बिजली योजना – गरीब परिवारों को सीधी राहत।
जयनगर-बद्रीबास को जोड़ने वाली सड़क नेपाल के साथ व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करेगी।
लौकहा से दिल्ली तक ट्रेन प्रस्तावित है – यह सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों के लिए वरदान साबित होगी।
इन सबके अलावा, शिक्षा, स्वच्छता, सड़क निर्माण, महिला सशक्तिकरण और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में भी कई योजनाएं धरातल पर हैं। यह केवल वादा नहीं, कार्य का प्रमाण है।
🔴 चन्दन कुमार झा (संवाददाता, राष्ट्रीय सागर): युवाओं को लेकर आपकी क्या सोच है?
🔵 आर. पी. मंडल (सांसद, जदयू):
युवाओं को लेकर मेरी सोच हमेशा सकारात्मक और भरोसे से भरी रही है। युवा शक्ति ही राष्ट्र की ऊर्जा है। आज का युवा केवल नौकरी नहीं चाहता – वह नेतृत्व करना चाहता है, बदलाव लाना चाहता है। मेरी यह सोच है कि हमें युवाओं को अवसर देने चाहिए, न केवल राजनीति में बल्कि समाजसेवा, उद्यमिता, तकनीक, शिक्षा जैसे हर क्षेत्र में।
मैं यह खुले मन से कहता हूं कि चाहे वो निशांत हों , चिराग पासवान हों, तेजस्वी यादव हों, या कन्हैया कुमार अगर वे सच्चे मन से काम करें, तो बिहार और देश को एक नई दिशा दे सकते हैं। आलोचना जरूरी है, लेकिन प्रशंसा भी उसी तरह आवश्यक है। राजनीति में ईमानदारी, पारदर्शिता और ज़मीन से जुड़ाव सबसे जरूरी है। सोशल मीडिया के युग में सब कुछ जनता के सामने है – अब नकाब पहनकर राजनीति नहीं चलती। जो सच्चा होगा, वही टिकेगा। युवाओं के लिए मेरा संदेश है – सपने देखिए, पर मेहनत से पूरा कीजिए। राजनीति आपको मंच देती है, पर जनता ही आपको स्वीकार करती है।
इस विस्तृत और सजीव इंटरव्यू में सांसद आर. पी. मंडल ने न केवल विपक्ष की राजनीति पर तीखा प्रहार किया, बल्कि विकास कार्यों, लोकतंत्र की रक्षा और युवा नेतृत्व की भूमिका को लेकर अपने स्पष्ट विचार रखे। खास बात यह रही कि उन्होंने विरोधी नेताओं की सराहना करते हुए राजनीतिक शिष्टाचार का परिचय दिया।
ऐसे इंटरव्यू कम ही होते हैं, जहां बात नारेबाज़ी से नहीं, नीति और नीयत से होती है। बिहार की ज़मीन से निकली यह आवाज़ निश्चय ही आने वाले समय में राजनीति की दिशा तय करेगी।
✍️ रिपोर्ट: चन्दन कुमार झा
संवाददाता, राष्ट्रीय सागर (नई दिल्ली)
संस्करण: पटना | रांची | नई दिल्ली





