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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:03 · नई दिल्ली संस्करण

पुतिन का दिल्ली दौरा: बिश्केक मुलाकात के बाद रूस की भारत को बड़ी रणनीतिक पेशकश

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
पुतिन का दिल्ली दौरा: बिश्केक मुलाकात के बाद रूस की भारत को बड़ी रणनीतिक पेशकश

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस महीने होने वाली दिल्ली यात्रा के दौरान भारत को दो सबसे उन्नत हथियार प्रणालियों एस-500 प्रोमेथियस एयर डिफेंस एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम और एसयू-57 फेलन स्टील्थ फाइटर जेट की बिक्री के लिए बहुत बड़ा प्रस्ताव देने की तैयारी में हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन की हाल ही में किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में हुई मुलाकात के कुछ ही दिनों बाद यह खबर सामने आई है।

यह रणनीतिक पेशकश तब आई है जब भारत अपनी हवाई रक्षा प्रणाली और लड़ाकू विमानों की क्षमता को तेजी से मजबूत कर रहा है, साथ ही विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम करके आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे रहा है। हालांकि, मॉस्को का यह प्रस्ताव तब आया है, जब भारत ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी देश से पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान नहीं खरीदेगा, बल्कि अपने स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट एएमसीए (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) के विकसित होने का इंतजार करेगा।

लेकिन रूस की इस पेशकश के केंद्र में एस-500 प्रोमेथियस है, जिसे मॉस्को अपना सबसे नया लंबी दूरी का एयर और मिसाइल डिफेंस सिस्टम बताता है। रूस इस भारत-रूस हवाई रक्षा साझेदारी में अगले संभावित कदम के तौर पर पेश कर रहा है। भारत पहले से ही रूसी एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम को सफलतापूर्वक संचालित कर रहा है, जिसने पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 314 किलोमीटर की दूरी से पाकिस्तान के अवाक्स विमान को मार गिराकर एक विश्व रिकॉर्ड बनाया था। रूस अब एस-400 को मिली इसी कामयाबी का लाभ उठाना चाहता है।

बिश्केक में प्रधानमंत्री मोदी के साथ मुलाकात से ठीक पहले, पुतिन सरकार ने भारत को 5 और एस-400 स्क्वाड्रन की आपूर्ति करने का एक नया प्रस्ताव भी दिया है, जो पहले हुए अनुबंध की संख्या से दोगुनी है। यह प्रस्ताव तब आया है जब भारत अपने स्वदेशी लंबी दूरी के एयर डिफेंस प्रोग्राम प्रोजेक्ट कुशा के शुरुआती हिस्सों की टेस्टिंग शुरू कर रहा है, जिसका लक्ष्य भविष्य में एस-400 क्लास के सिस्टम का भारतीय विकल्प तैयार करना है।

एसयू-57 लड़ाकू विमान को लेकर भारत पहले ही अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुका है। एयर डिफेंस के मोर्चे पर, भारत के पास पहले से ही अपना बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस प्रोग्राम है जो काफी उन्नत चरण में है, जबकि प्रोजेक्ट कुशा का मकसद विशेष रूप से देश में बनी लंबी दूरी की हवाई रक्षा क्षमता विकसित करना है। इसलिए एस-500 पर कोई भी फैसला उन प्रणालियों को ध्यान में रखकर करना होगा जिनमें भारत ने पहले ही कई सालों तक विकास, धन और तकनीकी प्रयास लगाए हैं।

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