पुष्कर कॉरिडोर बनाने का पुष्करवासियों ने किया विरोध
अजमेर, । उज्जैन, अयोध्या, काशी की तरह राजस्थान के अजमेर स्थित
तीर्थ राज पुष्कर में जगतपिता ब्रह्मा जी के मंदिर को कॉरिडोर बनाकर भव्यता
देने के विचार की बुधवार को पुष्करवासियों ने ही हवा निकाल दी। पुष्कर के
ब्रह्मामंदिर मार्ग पर स्थित प्रतिष्ठानों के व्यापारियों और निवासियों ने
प्रतिष्ठान बंद कर घंटों विरोध प्रदर्शन किया और नारेबाजी करते हुए नगर
पालिका चेयरमैन कमल पाठक एवं उपखण्ड अधिकारी को ज्ञापन दिया। पुष्करवासियों
ने इस दौरान नारे लगाए कि पुष्कर को तीर्थ ही रहने दो पर्यटन स्थल मत
बनाओ।
गौरतलब है कि पुष्कर कॉरिडोर बनाने के दौरान दुकान
एवं आवास तोड़ने की कथित संभावनाओं के चलते बुधवार को ब्रह्मा मंदिर बाजार
के दुकानदारों ने अपने-अपने प्रतिष्ठान बंद करके मुख्य बाजार होते हुए नगर
पालिका एवं उपखंड कार्यालय तक नारेबाजी करके रैली निकाली । व्यापारियों ने
कॉरिडोर बनाने का विरोध किया । इस दौरान सभी दुकानदारों ने नगर पालिका
अध्यक्ष कमल पाठक सहित जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत को जन सुनवाई में
जाकर ज्ञापन सौंपा तथा कॉरिडोर नहीं बनाने की मांग की। दुकानदारों का आरोप
था कि सर्वे के दौरान लगाए गए निशान से ब्रह्मा मंदिर तक कि उनकी दुकान
एवं आवास तोड़ने से रोजगार खोने के साथ-साथ परिवार बेरोजगार हो जाने की
स्थिति बन रही है। इसलिए कॉरिडोर नहीं बनना चाहिए । दुकानदारों से वार्ता
करते हुए जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने भरोसा दिलाया कि किसी प्रकार
के तोड़फोड़ नहीं होगी तथा जन भावना के अनुरूप पुष्कर के हित में सब की
राय लेकर ही कॉरिडोर अंतिम रूप दिया जाएगा इसके बाद सभी व्यापारी विरोध
खत्म करके लौट गए।
गौरतलब है कि राजस्थान में भजनलाल शर्मा
के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी सरकार आने तथा केंद्र में एनडीए की
सरकार होने को लेकर डबल इंजन सरकार का पहले से यह वादा रहा कि तीर्थगुरु
पुष्कर जो पूरे विश्व में जगतपिता ब्रह्मा जी का एक मात्र तीर्थ स्थल है
वहां अन्य धार्मिक पौराणिक, ऐतिहासिक स्थलों की तरह ही कुछ नया किया जाए
जिससे आने वाली पीढ़ियों को धार्मिक और आध्यात्मिक पोराणिक कथाओं का बोध
कराया जा सके। इस नजरिए से सरकार यहां भव्य कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव
तैयार कर रही है। भाजपा के विधायक और राज्य सरकार के मंत्री जन संसाधन
सुरेश रावत अपने चुनावी वादे को पूरा करने के नजरिए से इस दिशा में जुटे
हुए हैं। किन्तु पुष्करवासियों को मानना है कि इससे उनका रोजगार और घर
प्रतिष्ठान का नुकसान होगा।पुष्कर का धार्मिक और तीर्थ स्वरूप सिमट जाएगा।
लोग पर्यटन की दृष्टि से ही पुष्कर आएंगे और होटलों में रहकर चले जाऐंगे।




