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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:32 · नई दिल्ली संस्करण

दिल्ली महिला आयोग के ठप रहने पर हाईकोर्ट में जनहित याचिका, तत्काल बहाली की मांग

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
दिल्ली महिला आयोग के ठप रहने पर हाईकोर्ट में जनहित याचिका, तत्काल बहाली की मांग

नई दिल्ली। दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) के लंबे समय से काम न करने को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है। यह याचिका राजद सदस्य सुधाकर सिंह ने दायर की है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि जनवरी 2024 से दिल्ली महिला आयोग का कार्यालय बंद पड़ा है और यह पूरी तरह से ठप हो चुका है।

जनवरी 2024 से आयोग के अध्यक्ष पद पर कोई नियुक्ति नहीं हुई है।

स्वाति मालीवाल के राज्यसभा में चुने जाने के बाद यह पद खाली है। इसके अलावा सदस्यों की भी कमी है और मई 2024 में 223 अनुबंधित कर्मचारियों को हटा दिया गया था। नतीजतन, कोई स्टाफ नहीं बचा है, जिससे काउंसलिंग यूनिट, रेप क्राइसिस सेल और शिकायत सुनवाई की व्यवस्था पूरी तरह बंद हो गई है।

महिलाओं की मदद के लिए बनी यह महत्वपूर्ण संस्था अब काम नहीं कर रही, जबकि दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं।

याचिकाकर्ता ने कहा है कि इससे महिलाओं के मौलिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन हो रहा है। संविधान के अनुच्छेद 14, 15(3) और 21 का हवाला देते हुए याचिका में दिल्ली सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया गया है। महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और न्याय सुनिश्चित करने वाली इस संवैधानिक संस्था के बंद रहने से पीड़ित महिलाओं के पास कोई सहारा नहीं बचा है।

याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट से मांग की गई है कि आयोग को तुरंत पूरी तरह बहाल किया जाए। तय समयसीमा में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की जाए, स्टाफ बहाल किया जाए और शिकायत निवारण व्यवस्था फिर से शुरू की जाए।

साथ ही भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो, इसके लिए अदालत की निगरानी में प्रक्रिया चलाई जाए।

यह मामला महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा होने के कारण काफी महत्वपूर्ण है। दिल्ली महिला आयोग महिलाओं की शिकायतों पर सुनवाई, काउंसलिंग और कानूनी मदद प्रदान करता था। अब इसकी अनुपस्थिति में पीड़ित महिलाओं को भारी परेशानी हो रही है।

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