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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:43 · नई दिल्ली संस्करण

पीओके के हालात पर अमेरिका में विरोध, पाकिस्तान दूतावास के बाहर प्रदर्शन

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
पीओके के हालात पर अमेरिका में विरोध, पाकिस्तान दूतावास के बाहर प्रदर्शन

वॉशिंगटन। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में बिगड़ते मानवीय हालात को लेकर वॉशिंगटन में पाकिस्तान दूतावास के बाहर लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने इलाके में जारी अशांति के दौरान लोगों की मौत, घायल होने और बल प्रयोग की खबरों पर चिंता जताई।

सोशल मीडिया पर शेयर की गई पोस्ट के अनुसार, हताहतों की बढ़ती संख्या के बीच स्थिति को लेकर चिंता जताने और जवाबदेही की मांग करने के लिए प्रदर्शनकारी पाकिस्तानी दूतावास के बाहर जमा हुए।

यह विरोध प्रदर्शन पीओके में बढ़ते तनाव के बीच हुआ है, जहां प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पों में कई लोगों की मौत और घायल होने की खबरें हैं।

रिपोर्ट्स में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों ने असली गोलियों (लाइव एम्युनिशन) का इस्तेमाल किया।

प्रदर्शन से जुड़ी सोशल मीडिया पोस्ट में इस जमावड़े को इलाके में गंभीर मानवीय संकट के खिलाफ विरोध बताया गया। इसमें शामिल लोगों ने मरने वालों और घायलों की बढ़ती संख्या तथा संचार पर लगी पाबंदियों की ओर ध्यान दिलाया।

पीओके में अशांति का संबंध जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेतृत्व में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों से है। ये प्रदर्शन कई तरह की राजनीतिक और आर्थिक मांगों को लेकर हो रहे हैं, जिनमें शासन-व्यवस्था, अधिकारों और जन-सुविधाओं से जुड़ी चिंताएं शामिल हैं। खबरों के अनुसार इस अशांति के दौरान इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं में भी रुकावटें आई हैं।

हिंसा की खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं बढ़ गई हैं और मौतों व घायलों के मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। मानवाधिकार अधिकारियों ने अधिकारियों से जवाबदेही सुनिश्चित करने और आम नागरिकों की सुरक्षा करने का आग्रह किया है।

पिछले तीन दिनों में पीओके में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई के कारण अब तक 40 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और दर्जनों लोग घायल हुए हैं। जानकारों का मानना ​​है कि विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से जान गंवाने वाले स्थानीय लोगों की संख्या 125 या उससे भी अधिक हो सकती है।

रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए यूनाइटेड कश्मीर पीपल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) ने बुधवार को कहा कि 27 और 28 जुलाई के बीच रावलकोट, मीरपुर और कब्जे वाले इलाके के दूसरे हिस्सों में लगभग 40 आम नागरिक मारे गए, जबकि कई अन्य घायल हुए और उन्हें मनमाने ढंग से गिरफ्तार किया गया।

समूह ने आरोप लगाया कि 5 जून से अब तक 100 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। कई सौ लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा सैकड़ों लोगों को जबरदस्ती गायब कर दिया गया है।

पाकिस्तानी बलों के अत्याचारों की निंदा करते हुए यूकेपीएनपी ने कहा कि "शांतिपूर्ण नागरिकों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा या गैर-कानूनी बल का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का गंभीर उल्लंघन होगा और यह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपराध की श्रेणी में आ सकता है।"

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