जंतर-मंतर पर प्रदर्शन पड़ा भारी: जीबीयू छात्र नेता को शांति भंग मामले में 5 लाख रुपये का नोटिस

दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित एक विरोध प्रदर्शन में भाग लेना गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी (GBU) के एक छात्र के लिए गंभीर कानूनी अड़चन का कारण बन गया है। विश्वविद्यालय के छात्र और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) की उत्तर प्रदेश राज्य कमेटी के सदस्य अक्षत त्रिपाठी को ग्रेटर नोएडा के कार्यपालक मजिस्ट्रेट द्वारा शांति भंग करने के आरोप में 5 लाख रुपये का कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
यह प्रशासनिक कार्रवाई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 130 के तहत की गई है। इस कार्रवाई का मुख्य आधार ईकोटेक-1 पुलिस थाने के सब-इंस्पेक्टर द्वारा सौंपी गई एक रिपोर्ट है। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि अक्षत त्रिपाठी ने जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले हुए प्रदर्शन के दौरान छात्रों को सरकार के खिलाफ भड़काने, लामबंद करने और शांति व्यवस्था को प्रभावित करने का प्रयास किया।
दूसरी ओर, अक्षत त्रिपाठी ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्होंने प्रदर्शन में पूरी तरह से लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से हिस्सा लिया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस समय यह विरोध प्रदर्शन हुआ, उस दौरान गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी पिछले तीन महीनों से बंद पड़ी थी। इसके अलावा, उन्होंने यह भी जानकारी दी कि 20 जुलाई को हुए एक अन्य छात्र प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई में वे चोटिल भी हुए थे।
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने अपने सदस्य को जारी किए गए इस भारी-भरकम नोटिस की तीखी आलोचना की है। संगठन का आरोप है कि उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय पुलिस असहमति की आवाज को कुचलने के लिए कानून-व्यवस्था के प्रावधानों का दुरुपयोग कर रही हैं। एसएफआई के अनुसार, जंतर-मंतर पर हुआ यह प्रदर्शन पेपर लीक, बढ़ती बेरोजगारी और जर्जर शिक्षा व्यवस्था जैसे जनहित के महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर आयोजित किया गया था। छात्रों को लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल करने से रोकने और डराने का प्रयास बताते हुए, एसएफआई ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला दिया और प्रशासन से अक्षत त्रिपाठी को जारी नोटिस को तुरंत प्रभाव से वापस लेने की मांग की है।





