मुख्य सामग्री पर जाएँ
ब्रेकिंग
Rajasthan Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव का ऐलान, 4 चरणों में होगी वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूलमुंबई में CJP का प्रदर्शन पड़ा भारी! जेल भरो आंदोलन पर FIR, आयोजकों में हड़कंपज्ञानेश कुमार पर चले लोकतंत्र की हत्या का मुकदमा! प्रमोद तिवारी का बड़ा हमलाBJP का झंडा उतारने वाले संजयन त्रिपाठी अब साइकिल पर सवार, समाजवादी पार्टी में हुए शामिलCM Yogi का बड़ा तोहफा: 4.60 लाख छात्रों के खाते में आई छात्रवृत्ति, आपके खाते में आई क्या? चेक करेंNoida: सुपरनोवा की 43वीं मंजिल से युवक ने लगाई छलांग, मौके पर दर्दनाक मौत, सोसाइटी में हड़कंपमुंबई प्रदर्शन के बाद CJP का दिल्ली कूच का ऐलान, अभिजीत दिपके ने कही ये बड़ी बातगठबंधन में फूट! रायबरेली से डरते थे राहुल गांधी! सपा नेता का बड़ा खुलासा, अखिलेश ने दी थी धमकी

सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:39 · नई दिल्ली संस्करण

प्रधानमंत्री मोदी करेंगे आचार्य श्री 108 विद्यानंद जी महाराज के शताब्दी समारोह का उद्घाटन

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
प्रधानमंत्री मोदी करेंगे आचार्य श्री 108 विद्यानंद जी महाराज के शताब्दी समारोह का उद्घाटन

प्रधानमंत्री मोदी करेंगे आचार्य श्री 108 विद्यानंद जी महाराज के शताब्दी समारोह का उद्घाटन – अहिंसा, सत्य और धर्म की राष्ट्रीय वाणी बनेगा यह पर्व

नई दिल्ली, 28 जून 2025

विज्ञान भवन में एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण का साक्षी बनने जा रहा है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैन संत परंपरा के स्तंभ, दार्शनिक-आध्यात्मिक गुरुवर आचार्य श्री 108 विद्यानंद जी महाराज के शताब्दी वर्ष समारोह का शुभारंभ करेंगे।

यह समारोह भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय और भगवान महावीर अहिंसा भारती ट्रस्ट के सहयोग से आयोजित है, जो 1925 में जन्मे इस युग पुरुष के 100वें जन्मवर्ष को सांस्कृतिक, दार्शनिक और सामाजिक पुनर्जागरण के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर मनाएगा।

अहिंसा की प्रतिमूर्ति – आचार्य श्री का जीवन परिचय

*जन्म: 22 अप्रैल 1925, शेदबल, बेलगावी (कर्नाटक)

*दीक्षा: बाल्यकाल में, कठोर ब्रह्मचर्य व तप की साधना

*कंठस्थ जैन आगमिक छंद: 8000+

*रचनाएँ: 50+ ग्रंथ (अनेकांतवाद, मोक्षमार्ग, दर्शन शास्त्र)

*देशव्यापी नंगे पांव यात्रा, कायोत्सर्ग ध्यान, जैन ध्वज की रचना (1975)

उनका जीवन त्याग, ज्ञान और राष्ट्र चेतना का ऐसा संगम है, जिसने आध्यात्मिक भारत को एक नई दृष्टि दी।

उद्घाटन समारोह की मुख्य विशेषताएं:

✅ प्रधानमंत्री का मुख्य भाषण – आचार्य जी की शिक्षाओं को 21वीं सदी के भारत के लिए प्रासंगिक बताते हुए

✅ जीवनी पुस्तक का लोकार्पण – साहित्य, दर्शन और सुधारक के रूप में योगदान पर केंद्रित

✅ स्मारक डाक टिकट और सिक्का – संस्कृति मंत्रालय द्वारा विशेष श्रद्धांजलि

✅ विशेष प्रदर्शनी – दुर्लभ चित्र, अभिलेख, धरोहर और दार्शनिक योगदान

✅ लघु वृत्तचित्र – उनकी आध्यात्मिक यात्रा और राष्ट्रीय चेतना पर प्रकाश

✅ धार्मिक विचार संगोष्ठी – प्रज्ञासागर मुनि, विद्वानों और गुरुओं के प्रेरणादायक संबोधन

शताब्दी वर्ष का उद्देश्य – जैन दर्शन से नई पीढ़ी को जोड़ना

2025 से 2026 तक चलने वाले इस शताब्दी वर्ष में युवा भागीदारी, अंतर-धार्मिक संवाद, मंदिर संपर्क कार्यक्रम और जैन विरासत जागरूकता जैसे राष्ट्रीय आयोजन होंगे। यह वर्ष सत्य, तप, क्षमा और संयम जैसे मूल्यों की राष्ट्रीय पुनर्पुष्टि का अवसर है।

भारत की आत्मा की आवाज़ – आचार्य श्री की शिक्षाएँ

आचार्य जी ने सिर्फ जैन समाज के लिए नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए “अहिंसा ही आत्मा का धर्म है” जैसे विचारों को संघर्ष और समरसता का मार्गदर्शन बनाया।

उन्होंने संप्रदाय से ऊपर उठकर समता, क्षमा और करुणा को आत्मसात करने का आह्वान किया — यही भारत की सनातन धरोहर है।

यह आयोजन क्यों है ऐतिहासिक?

एक संत, जिन्होंने धर्म को दर्शन से जोड़ा और दर्शन को कर्म में उतारा

एक युगपुरुष, जिन्होंने ध्वज, प्रतीक और शास्त्र को जीवन और साधना का हिस्सा बनाया

एक साधक, जिनकी तपस्या भारत की सांस्कृतिक रीढ़ बन गई

यह ख़बर दूसरों तक पहुँचाएँ

WhatsAppFacebookX

संबंधित ख़बरें