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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 9:51 · नई दिल्ली संस्करण

देश का पावर ट्रांसमिशन नेटवर्क 5 लाख सर्किट किलोमीटर से अधिक हुआ

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
देश का पावर ट्रांसमिशन नेटवर्क 5 लाख सर्किट किलोमीटर से अधिक हुआ

नई दिल्‍ली। देश का पावर ट्रांसमिशन नेटवर्क 5 लाख सर्किट किलोमीटर से अधिक हो गया। विश्व के सबसे बड़े सिंक्रोनस राष्ट्रीय ग्रिड ने यह उपलब्धि 14 जनवरी को हासिल की, जब राजस्थान नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र से नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी के लिए भादला द्वितीय से सीकर द्वितीय सबस्टेशन तक 765 केवी की 628 सी.के.एम लंबी ट्रांसमिशन लाइन चालू की गई। इस ट्रांसमिशन लाइन के चालू होने से भादला, रामगढ़ और फतेहगढ़ सौर ऊर्जा परिसर के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र से अतिरिक्त 1100 मेगावाट बिजली की निकासी संभव हो सकेगी।विद्युत मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि अप्रैल, 2014 से देश के पारेषण नेटवर्क में 2.09 लाख सीकेएम (220 केवी और उससे ऊपर) पारेषण लाइनों के जुड़ने से 71.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिससे (220 केवी और उससे ऊपर) रूपांतरण क्षमता में 876 जीवीए की वृद्धि हुई है। अंतर-क्षेत्रीय विद्युत हस्तांतरण क्षमता, जो अब 1,20,340 मेगावाट है, ने क्षेत्रों के बीच बिजली के निर्बाध हस्तांतरण को सक्षम बनाया है, जिससे "एक राष्ट्र-एक ग्रिड-एक आवृत्ति" की परिकल्पना सफलतापूर्वक साकार हुई है।मंत्रालय के मुताबिक वर्तमान में कार्यान्वित हो रही अंतरराज्यीय पारेषण परियोजनाओं से लगभग 40 हजार सीकेएम ट्रांसमिशन लाइनें और 399 जीवीए की रूपांतरण क्षमता जुड़ जाएगी। इसके अतिरिक्त, कार्यान्वित हो रही अंतरराज्यीय पारेषण परियोजनाओं से 27,500 सीकेएम ट्रांसमिशन लाइनें और 134 जीवीए की रूपांतरण क्षमता और जुड़ने की उम्मीद है, जिससे ग्रिड की विश्वसनीयता और बिजली निकासी क्षमता में और वृद्धि होगी। पारेषण क्षमता में वृद्धि से गैर-जीवाश्म ईंधन से होने वाले बिजली उत्पादन में हो रही वृद्धि को दूर करने में सहायता मिलेगी, जिसका लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट तक पहुंचना है।उल्‍लेखनीय है कि 5,00,000 सीकेएम ट्रांसमिशन लाइनों की यह महत्‍वपूर्ण उपलब्धि पूरे देश में विश्वसनीय, किफायती और सुरक्षित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण में तीव्र वृद्धि का समर्थन करने की दिशा में सरकार के निरंतर प्रयासों को दर्शाता है।

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