केंद्रीय पोत परिवहन और जलमार्ग व आयुष मंत्री सर्बानंद म्यांमार के सितवे बंदरगाह पर पहले भारतीय मालवाहक पोत की अगवानी करेंगे।
आकाश श्रीवास्तव
केंद्रीय पोत परिवहन और जलमार्ग व आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल 9 मई, 2023 को म्यांमार के सितवे बंदरगाह पर पहले भारतीय मालवाहक पोत की अगवानी करेंगे। इस समारोह में भारत के कोलकाता स्थित श्यामा प्रसाद मुखर्जी पत्तन से म्यांमार के रखाइन राज्य स्थित सितवे पत्तन के बीच मालवाहक पोतों के नियमित पारगमन का उद्घाटन करने की संभावना है। इससे दोनों देशों के बीच परिवहन के एक नए युग की शुरुआत होगी। सोनोवाल ने असम के डिब्रूगढ़ में मीडियाकर्मियों को बताया कि यह मार्ग पूरे बंगाल की खाड़ी प्रायद्वीप के लिए शानदार आर्थिक क्षमता को खोलने की संभावना रखता है और यह दक्षिण एशिया व दक्षिण- पूर्व एशिया क्षेत्रों को आपस में जोड़ने का काम करता है।
इस अवसर पर सोनोवाल ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तर-पूर्व क्षेत्र भारत के विकास के एजेंडे में सबसे आगे है। जैसा कि हम इस ऐतिहासिक द्वार पर खड़े हैं,जब भूमि से घिरे उत्तर पूर्व भारत आखिरकार अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग तक बहुत कम समय में पहुंच पाएगा, यह नरेन्द्र मोदी जी के 'एक्ट ईस्ट' के दूरदर्शी संकल्प के बिना संभव नहीं होता। इस क्षेत्र की प्रगति और समृद्धि के लिए मोदी जी की प्रतिबद्धता के कारण आने वाले वर्षों में उत्तर पूर्व भारत की व्यापार संभावना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हम म्यांमार में सितवे पत्तन के तेजी से कार्यान्वयन के साथ नेतृत्व करने में सक्षम हैं।
उत्तर-पूर्व भारत के अलावा यह पत्तन दक्षिण पूर्व एशिया के साथ एक पुल के रूप में कार्य करके भारत और म्यांमार के अलावा बांग्लादेश, भूटान और यहां तक कि नेपाल के लिए भी बड़ी व्यावसायिक संभावनाओं को खोलेगा। यह मोदी जी के 'सबका साथ, सबका विकास' दर्शन के कार्यान्वयन का सही प्रतिबिंब है। सितवे पत्तन का विकास कलादान मल्टीमॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट परियोजना (केएमटीटीपी) का एक हिस्सा है। एक बार परिचालित हो जाने के बाद यह दक्षिण पूर्व एशिया के साथ मल्टी मॉडल ट्रांजिट कनेक्टिविटी की सुविधा प्रदान करेगा। भारत में मिजोरम राज्य के साथ म्यांमार में सितवे पत्तन को जोड़ने वाली कालादान नदी पर एक मल्टीमॉडल पारगमन परिवहन सुविधा के निर्माण व परिचालन के लिए भारत और म्यांमार के बीच एक प्रारूप समझौते के तहत सितवे पत्तन को विकसित किया गया है।
म्यांमार के पलेटवा से मिजोरम में जोरिनपुई तक: म्यांमार में सितवे पत्तन एक अंतर्देशीय जलमार्ग के माध्यम से पलेटवा के साथ और इसके बाद सड़क मार्ग के जरिए पलेटवा से मिजोरम के जोरिनपुई से जुड़ता है। कोलकाता से सितवे पत्तन तक का माल बांग्लादेश स्थित टेकनाफ बंदरगाह तक भेजा जा सकता है, जो सितवे से केवल 60 समुद्री मील की दूरी पर है। टेकनाफ बंदरगाह से माल को सड़क मार्ग के जरिए त्रिपुरा के सबरूम तक ले जाया जा सकता है, जिसकी दूरी 300 किलोमीटर है। बांग्लादेश और त्रिपुरा के बीच सबरूम एक एकीकृत सीमा शुल्क बॉर्डर है। परिवहन समय और लॉजिस्टिक्स लागत में महत्वपूर्ण कमी के जरिए सितवे पत्तन और कलादान परियोजना से त्रिपुरा को काफी अधिक लाभ होगा।
सोनोवाल ने कहा, “एक बार पूरी तरह से परिचालित हो जाने के बाद कलादान मल्टी मॉडल परिवहन टीपी सितवे पत्तन के जरिए भारत के पूर्वी तट से उत्तर-पूर्वी राज्यों तक वैकल्पिक कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। सिलीगुड़ी से कोलकाता के मौजूदा मार्ग की तुलना में यह उत्तर पूर्व भारत के व्यापार और वाणिज्य के लिए कहीं अधिक व्यावहारिक रास्ता है। इससे समय व धन की बचत और उत्कृष्ट दक्षता प्राप्त होगी। कोलकाता से आइजोल तक माल की ढुलाई की लागत व समय में 50 फीसदी से अधिक की गिरावट देखी गई है, जब कार्गो (माल जहाज) को कोलकाता से सितवे, इसके बाद पलेटवा और फिर सड़क मार्ग से आइजोल व पूरे उत्तर पूर्व भारत में भेजा जाता है। इसी तरह कोलकाता से अगरतला भेजे जाने वाले माल को इस मार्ग के जरिए कम लागत और समय में भेजा जा सकेगा।





