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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:05 · नई दिल्ली संस्करण

बिहार में UCC पर सियासी बयानबाजी तेज, श्याम रजक बोले- लागू नहीं होने देंगे

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
बिहार में UCC पर सियासी बयानबाजी तेज, श्याम रजक बोले- लागू नहीं होने देंगे

-राजग के घटक दलों में अलग-अलग सुर

पटना। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 2029 से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)-राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) शासित 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के बयान के बाद बिहार में सियासी हलचल तेज हो गई है। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के वरिष्ठ नेता और फुलवारी शरीफ से विधायक श्याम रजक ने सोमवार को स्पष्ट कहा कि बिहार में यूसीसी लागू नहीं होने दिया जाएगा। वहीं, राजग के अन्य घटक दलों ने यूसीसी के समर्थन या कानून बनने के बाद इस पर विचार करने की बात कही है।

श्याम रजक ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर कहा कि बिहार में गठबंधन की सरकार है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भाजपा से हैं, लेकिन सरकार गठबंधन की है। इसलिए बिहार में यूसीसी लागू नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब यह विधेयक संसद में आया था, तब जदयू के नेता नीतीश कुमार ने स्पष्ट किया था कि केंद्र में विधेयक का समर्थन किया गया है, लेकिन राज्य में इसे लागू नहीं किया जाएगा। जदयू अपने इस रुख पर कायम है।

इधर, केंद्रीय मंत्री और भाजपा के राज्यसभा सदस्य सतीश चंद्र दुबे ने यूसीसी का समर्थन करते हुए कहा कि कई राज्य इसे लागू कर चुके हैं और आने वाले दिनों में अन्य प्रदेश भी इसे लागू करेंगे। उन्होंने कहा कि यह देशहित में जरूरी है। गृह मंत्री अमित शाह ने सोच-समझकर ही यह बयान दिया होगा और वह पूरी तैयारी के बाद ही कोई बात कहते हैं।

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के एक अन्य घटक लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने भी यूसीसी के पक्ष में रुख जताया है। पार्टी प्रवक्ता प्रोफेसर विनीत कुमार सिंह ने कहा कि लोजपा (रामविलास) चाहती है कि यूसीसी पूरे देश में लागू हो। उन्होंने विपक्ष से भी इसका समर्थन करने की अपील की।

वहीं, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के वरिष्ठ नेता और बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार सुमन ने कहा कि जब यूसीसी से संबंधित कानून आएगा, तब पार्टी इस पर विचार करेगी।

इससे पहले रविवार को मुंबई में संवाददाता सम्मेलन में अमित शाह ने कहा था कि भाजपा-राजग शासित 21 राज्यों में 2029 से पहले यूसीसी लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा था कि कई राज्यों में पहले ही समान नागरिक संहिता लागू हो चुकी है और उन्हें विश्वास है कि बाकी राज्यों में भी इसे लागू किया जाएगा।

क्या है यूसीसी?

समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी का आशय देश के सभी नागरिकों के लिए व्यक्तिगत मामलों से जुड़े विषयों पर एक समान कानून से है। इसके तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति के बंटवारे, गोद लेने, भरण-पोषण, वसीयत और पारिवारिक अधिकार जैसे मामलों के लिए समान कानूनी प्रावधान किए जाने की परिकल्पना है।

वर्तमान में इन विषयों पर अलग-अलग समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं, जबकि आपराधिक मामलों में देशभर में समान कानून लागू है। यूसीसी लागू होने की स्थिति में व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े मामलों में भी समान कानूनी व्यवस्था लागू होगी।

उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जिसने समान नागरिक संहिता लागू की। इसके बाद कुछ अन्य राज्यों ने भी इसे लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। बिहार में जदयू के विरोध के बाद यह मुद्दा राज्य में राजग के भीतर राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।

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