प्रधानमंत्री ने नालंदा विश्वविद्यालय का 800 साल बाद लौटाया गौरव,कहा- आग की लपटों में पुस्तकें भले जल जाएं लेकिन ज्ञान को नहीं मिटा सकती

प्रधानमंत्री ने नालंदा विश्वविद्यालय का 800 साल बाद लौटाया गौरव,कहा-
आग की लपटों में पुस्तकें भले जल जाएं लेकिन ज्ञान को नहीं मिटा सकतीं
-पीएम ने नालंदा विश्वविद्यालय के नेट जीरो ग्रीन कैंपस का किया उद्घाटन
-ज्ञान के केंद्र के रूप में रही नालंदा विश्वविद्यालय की पहचान: नीतीश कुमार
-बिहार विकास की राह पर बढ़ रहा आगे, नालंदा का ये परिसर उसी की एक प्रेरणा
पटना/नालंदा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार के नालंदा विश्वविद्यालय के नेट जीरो ग्रीन कैंपस का उद्घाटन किया। उद्घाटन के बाद 800 साल के बाद इस विश्वविद्यालय का गौरव लौटा है। पीएम मोदी के साथ सीएम नीतीश, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर और मौजूद रहे है।प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के वैभव को पुनः स्थापित करने की पहल के तहत नालंदा विश्वविद्यालय के नए कैम्पस का बुधवार को उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी में किया गया है।राजगीर की पंच पहाड़ियों में शुमार वैभारगिरि की तलहटी में नए नालंदा विश्वविद्यालय का निर्माण हुआ है। नालंदा विश्वविद्यालय के नये परिसर का निर्माण 455 एकड़ के विशाल भूखंड पर किया गया है।नये कैंपस में कुल 24 बड़ी इमारत, 450 क्षमता का निवास हॉल, महिलाओं के लिए तथागत निवास हॉल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स व फूड कोर्ट, 40 हेक्टेयर में जलाशय, अखाड़ा, ध्यान कक्ष, 300 क्षमता का ऑडिटोरियम, योग परिसर, स्पोर्ट्स स्टेडियम, एथलेटिक ट्रैक के साथ आउटडोर स्पोर्ट्स स्टेडियम, व्यायामशाला, अस्पताल, पारंपरिक आहर-पइन जल नेटवर्क, सोलर फार्म आदि हैं।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने उद्धाटन भाषण में मोदी ने कहा कि बिहार अपने गौरव को वापस लाने के लिए जिस तरह विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है, नालंदा का ये परिसर उसी की एक प्रेरणा है। नालंदा एक पहचान है, एक सम्मान है। नालंदा एक मूल्य है, मंत्र है, गौरव है, गाथा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि नालंदा इस सत्य का उद्घोष है कि आग की लपटों में पुस्तकें भले जल जाएं लेकिन आग की लपटें ज्ञान को नहीं मिटा सकतीं। इस मौके पर विदेश मंत्री एस जयशंकर और 17 देशों के राजदूत ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया।प्रधानमंत्री ने कहा कि हम सभी जानते हैं कि नालंदा कभी भारत की परंपरा और पहचान का जीवंत केंद्र हुआ करता था। शिक्षा को लेकर यही भारत की सोच रही है। शिक्षा ही हमें गढ़ती है, विचार देती है और उसे आकार देती है। प्राचीन नालंदा में बच्चों का प्रवेश उनकी पहचान, उनकी राष्ट्रीयता को देख कर नहीं होता था। हर देश हर वर्ग के युवा यहां पर अध्ययन करने के लिए आते थे। नालंदा विश्वविद्यालय के इस नए परिसर में हमें उसी प्राचीन व्यवस्था को फिर से आधुनिक रूप में मजबूती देनी है और मुझे ये देख कर खुशी है कि दुनिया के कई देशों से आज यहां कई विद्यार्थी आने लगे हैं। दुनिया के कई देशों से यहां छात्र आने लगे हैं। नालंदा में 20 से ज्यादा देशों के छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। ये वसुधैव कुटुंबकम की भावना का कितना सुंदर प्रतीक है।उन्होंने कहा, '21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस है। आज भारत में योग की सैकड़ों विधाएं मौजूद हैं। हमारे ऋषियों ने कितना गहन शोध इसके लिए किया होगा लेकिन किसी ने योग पर एकाधिकार नहीं बनाया। आज पूरा विश्व योग को अपना रहा है, योग दिवस एक वैश्विक उत्सव बन गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय की पहचान ज्ञान के केंद्र के रूप में रही है। पुराने विश्वविद्यालय में करीब 10 हजार छात्र पढ़ते थे जबकि दो हजार शिक्षक बच्चों को पढ़ाते थे। उन्होंने कहा कि देश ही नहीं दुनिया के अनेक जगहों के लोग यहां आकर पढ़ाई करते थे लेकिन दुर्भाग्यवश यह विश्वविद्यालय नष्ट हो गया था।साल 2005 से हम लोगों को काम करने का मौका मिला और तब से हमने बिहार के विकास का काम शुरू किया। वर्ष 2006 में तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम बिहार आए थे। विधानमंडल में संबोधन के दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय को फिर से स्थापित करने की बात कही थी, जिसके बाद सरकार ने विश्वविद्यालय को फिर से स्थापित करने की पहल शुरू की।केंद्र सरकार से हमने अनुरोध किया था लेकिन उस वक्त केंद्र में जो सरकार थी वह जल्दी कुछ सुन नहीं रही थी। इसके बाद राज्य सरकार ने इसको लेकर नया कानून बनाया। राज्य सरकार ने नालंदा विश्वविद्यालय के लिए 455 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया था। वर्ष 2008 में जब काम शुरू हुआ तो कलाम साहब उसे देखने के लिए फिर से आए थे।2010 में हमारे अनुरोध पर नालंदा विश्वविद्यालय के लिए लोकसभा में बिल पारित किया गया। इसके बाद बिहार सरकार ने भूमि समेत अन्य चीजों को केंद्र सरकार को सौंप दिया था। फिर विश्वविद्यालक का काम धीरे-धीरे होता रहा और साल 2014 से पढ़ाई शुरू हो गई। केंद्र में 2014 में एनडीए की सरकार बनी तो काम में और तेजी आई। वर्ष 2016 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने विश्वविद्यालय के भवनों का शिलान्यास किया था।इस मौके पर बिहार के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने कहा कि नालंदा अपनी सांस्कृतिक और शैक्षिक धरोहर-विरासत है। अनेक वर्षों से इसपर ध्यान देने की आवश्यकता थी। इसको फिर एक बार उभार कर लाने की आवश्यकता थी। इसके प्रयास हमारे द्वारा किया जा रहा है।





