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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:18 · नई दिल्ली संस्करण

भारत के जीवंत लोकतंत्र को सुप्रीम कोर्ट ने लगातार किया मजबूतः प्रधानमंत्री

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन

नई

दिल्ली, 28 जनवरी । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को

सुप्रीम कोर्ट के हीरक जयंती समारोह का उद्घाटन किया। इस अवसर पर

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत की प्राथमिकता न्याय में आसानी और हर

नागरिक पर इसका हक है। सुप्रीम कोर्ट इस लक्ष्य की प्राप्ति का मुख्य

माध्यम है। सुप्रीम कोर्ट ने भारत के जीवंत लोकतंत्र को लगातार मजबूत किया

है। दूसरी ओर आज बन रहे कानून कल के भारत को मजबूत करेंगे।

सुप्रीम

कोर्ट के 75 वर्ष पूरे होने पर आयोजित इस समारोह में प्रधानमंत्री के साथ

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल सहित

सुप्रीम कोर्ट के अन्य न्यायाधीश मौजूद रहे। मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने

समारोह में बीआर अंबेडकर की प्रतिमा देकर प्रधानमंत्री का स्वागत किया।

प्रधानमंत्री

ने कहा कि ढांचागत सुविधाओं को विस्तार दिए जाने के सरकार के प्रयासों का

उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले सप्ताह ही केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट

परिसर के विस्तार के लिए 800 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि

बस संसद की तरह कोई इसे फिजूलखर्ची बताकर याचिका न दायर कर दे।

प्रधानमंत्री

ने मजबूत न्याय व्यवस्था को विकसित भारत का मुख्य आधार बताते हुए कहा कि

पुराने औपनिवेशिक काल के कानूनों को निरस्त कर तीन नए आपराधिक कानून लाए गए

हैं। इससे हमारी कानूनी नीति और अन्वेषण तंत्र एक नए चरण में प्रवेश कर

गया है। उन्होंने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि वे क्षमता

निर्माण प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए आगे आए।

उन्होंने

कहा, “आज बने कानून भारत का भविष्य उज्ज्वल करेंगे। वैश्विक स्तर पर हो रहे

बदलावों के साथ दुनिया की निगाहें भारत पर टिकी हैं, क्योंकि दुनिया का

विश्वास भारत पर मजबूत हो रहा है। ऐसे समय में, भारत के लिए यह महत्वपूर्ण

है कि वह हमें मिले हर अवसर का लाभ उठाए।”

प्रधानमंत्री ने

इस बात का विशेष उल्लेख किया कि इस बार एशिया में सुप्रीम कोर्ट की पहली

मुस्लिम महिला न्यायाधीश (सेवानिवृत्त) न्यायमूर्ति फातिमा बीबी को पद्म

भूषण से सम्मानित किया गया है। उन्होंने कहा कि यह हम सबके लिए गर्व का

विषय है।

तकनीक से न्याय पाने की प्रक्रिया को सरल करने की भूमिका

का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई समाधान से बहुत से

प्रक्रियाएं सरल हो रही हैं। उन्होंने इस दौरान सुप्रीम कोर्ट की डिजिटल

पहलों और फैसलों को सरल तथा स्थानीय भाषा में उपलब्ध कराए जाने के प्रयासों

की सराहना की। उन्होंने कहा कि यहां उपस्थित बहुत से साथी उनके हिंदी भाषा

में दिए गए भाषण को भाषिणी के माध्यम से अंग्रेजी में सुन पा रहे हैं।

इस

अवसर पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस विश्वास की पुष्टि

करता है कि न्यायपालिका को अन्याय, अत्याचार और मनमानी के खिलाफ एक सुरक्षा

कवच के रूप में काम करना चाहिए। शीर्ष अदालत समाधान और न्याय की संस्था

है। चंद्रचुड़ ने कहा कि हाइब्रिड (प्रत्यक्ष और वर्चुअल) सुनवाई अदालतों

से सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच का लोकतंत्रीकरण हो गया है। इसने उन लोगों

के लिए रास्ता खोल दिया है जो शारीरिक दूरी के कारण सुप्रीम कोर्ट तक जाने

में असमर्थ थे। इससे देश या दुनिया के किसी भी हिस्से में बैठा कोई भी

भारतीय वकील वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस कोर्ट के सामने बहस कर सकता

है।

इस दौरान मुख्य न्यायाधीश ने ई-फाइलिंग में होती लगातार वृद्धि

का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अब तक लगभग 1 लाख 28 हजार ई-फाइलिंग की जा

चुकी है। ई-फाइलिंग 25 राज्यों में उपलब्ध है। उन्होंने 29 लाख से अधिक

केस दाखिल किए हैं।

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