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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:19 · नई दिल्ली संस्करण

वैश्विक शांति और क्षेत्रीय मुद्दों पर अहम होगी प्रधानमंत्री मोदी की नॉर्वे यात्रा: राजदूत ग्लोरिया गंगटे

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
वैश्विक शांति और क्षेत्रीय मुद्दों पर अहम होगी प्रधानमंत्री मोदी की नॉर्वे यात्रा: राजदूत ग्लोरिया गंगटे

ओस्लो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 देशों की यात्रा के चौथे चरण में सोमवार को नॉर्वे पहुंचेंगे। भारत की राजदूत ग्लोरिया गंगटे ने प्रधानमंत्री की इस यात्रा को अहम बताया है। उन्होंने कहा कि यह दौरा भारत-नॉर्वे संबंधों को नई मजबूती देगा।

राजदूत ग्लोरिया गंगटे ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "प्रधानमंत्री सुबह नॉर्वे पहुंचेंगे और फिर होटल जाएंगे, जहां भारतीय समुदाय के सैकड़ों सदस्य उनका स्वागत करेंगे। नॉर्वे और भारत के बच्चों की ओर से एक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की नॉर्वे यात्रा से व्यापार, समुद्री संबंधों, हरित प्रौद्योगिकी और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

इसके अलावा, भारत और नॉर्डिक देश वैश्विक शांति, पश्चिम एशिया में तनाव और लंबे समय के लिए रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने पर भी चर्चा करेंगे।

ग्लोरिया गंगटे ने कहा, "जैसा कि आप जानते हैं, यह प्रधानमंत्री की नॉर्वे की पहली यात्रा है। भारत से नॉर्वे की पिछली प्रधानमंत्री-स्तरीय यात्रा के 43 साल बाद यह यात्रा हो रही है। इस दौरान कई विषयों पर चर्चाएं होंगी। दोनों पक्ष इस बात पर विचार कर रहे हैं कि वे वैश्विक शांति को बढ़ावा देने और दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में समस्याओं का समाधान खोजने के लिए किस तरह का योगदान दे सकते हैं।"

भारतीय राजदूत ने बताया कि इस यात्रा के एजेंडे में बहुत कुछ शामिल है। इसमें न केवल द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा होगी, बल्कि क्षेत्रीय मुद्दों पर भी बातचीत की जाएगी। उन्होंने कहा कि भारत और नॉर्डिक देशों के बीच हमेशा से बहुत अच्छे संबंध रहे हैं।

इस बात से कि तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन आयोजित हो रहा है, यह पता चलता है कि हम भविष्य में सहयोग की कितनी बड़ी संभावनाएं देख रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है। इसलिए नॉर्वे का मानना ​​है कि भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनने का हकदार है।

भारत और नॉर्वे के बीच सहयोग के वर्तमान में सबसे मजबूत स्तंभ माने जाने वाले क्षेत्रों पर ग्लोरिया गंगटे ने कहा, "फिलहाल समुद्री क्षेत्र हमारा सबसे मजबूत स्तंभ है। इसका प्रमाण यह है कि शिपओनर्स एसोसिएशन की ओर से नए जहाजों के लिए दिए जाने वाले लगभग 10 प्रतिशत ऑर्डर भारत को ही दिए जा रहे हैं।"

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