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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:48 · नई दिल्ली संस्करण

पीएम मोदी आज दिल्ली में नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में भरेंगे हुंकार

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
पीएम मोदी आज दिल्ली में नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में भरेंगे हुंकार

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को सुबह 11 बजे राजधानी के विज्ञान भवन में राष्ट्रीय स्तर के 'नारी शक्ति वंदन सम्मेलन' को संबोधित करेंगे।

इस सम्मेलन में सरकार, शिक्षा जगत, विज्ञान, खेल, उद्यमिता, मीडिया, सामाजिक कार्य और संस्कृति सहित विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियों और महिला उपलब्धि हासिल करने वालों की भागीदारी होने की उम्मीद है।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य हितधारकों के एक व्यापक समूह को एक साथ लाना है ताकि भारत की विकास यात्रा में महिलाओं की भूमिका पर विचार-विमर्श किया जा सके।

यह कार्यक्रम केंद्र सरकार द्वारा महिला नेतृत्व वाले विकास की दिशा में किए जा रहे व्यापक प्रयासों के हिस्से के रूप में आयोजित किया जा रहा है और इसका उद्देश्य निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में महिलाओं की अधिक भागीदारी के महत्व को रेखांकित करना है।

यह आयोजन सितंबर 2023 में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के ऐतिहासिक पारित होने की पृष्ठभूमि में हो रहा है, जो विधायी निकायों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस कानून में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण का प्रावधान है, जिसे भारत के राजनीतिक परिदृश्य के लिए एक परिवर्तनकारी कदम के रूप में देखा जा रहा है।

अब जब देश भर में महिला आरक्षण के कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, तो इस मुद्दे पर आगे विचार-विमर्श करने के लिए 16 से 18 अप्रैल तक संसद का सत्र बुलाया गया है।

इस सम्मेलन से इस पहल को गति मिलने और शासन में अधिक समावेशिता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि होने की उम्मीद है।

आधिकारिक बयान के अनुसार, सम्मेलन में भारत के भविष्य को आकार देने में महिलाओं की भागीदारी के महत्व पर भी जोर दिया जाएगा, क्योंकि देश 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने के अपने दीर्घकालिक दृष्टिकोण की ओर बढ़ रहा है, जिसे अक्सर 'विकसित भारत 2047' के रूप में जाना जाता है।

केंद्र सरकार ने लगातार महिला नेतृत्व वाले विकास को विकसित भारत के अपने दृष्टिकोण का एक केंद्रीय स्तंभ बताया है।

इस सम्मेलन से इस धारणा को बल मिलने और समावेशी एवं सतत विकास हासिल करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को और मजबूत करने की उम्मीद है।

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