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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:46 · नई दिल्ली संस्करण

पीएम मोदी बोले- गुरु ज्ञान ही नहीं, सुसंस्कारों से भी जीवन संवारते हैं

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
पीएम मोदी बोले- गुरु ज्ञान ही नहीं, सुसंस्कारों से भी जीवन संवारते हैं

नई दिल्ली,। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर बुधवार को सुभाषित शेयर किया है। उन्होंने देशवासियों को गुरु पूर्णिमा की बधाई दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "गुरु पूर्णिमा की सभी देशवासियों को बहुत-बहुत बधाई। गुरु ज्ञान के साथ ही अपने शिष्यों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर उन्हें सुविचार और सुसंस्कारों से सुशिक्षित करते हैं।

आइए, उनके आदर्शों को अपने जीवन का संबल बनाएं।"

पीएम की ओर से सोशल मीडिया पर एक श्लोक, "प्रेरकः सूचकश्चैव वाचको दर्शकस्तथा। शिक्षकः बोधकश्चैव षडेते गुरवः स्मृताः॥" भी साझा किया गया है। जिसका हिंदी अर्थ है कि जो जीवन में प्रेरणा का संचार करे, सही दिशा का संकेत दे, ज्ञान और सत्य का उपदेश करे, उचित मार्ग दिखाए, शिक्षा प्रदान करे तथा जीवन में सत्य का बोध कराकर आत्मविकास का मार्ग प्रशस्त करे, ये गुरु के छह स्वरूप बताए गए हैं।

बीते दिन मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी की ओर से सुभाषित शेयर करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा गया था, "प्रकृति के संरक्षण और सम्मान में ही मानवता का कल्याण निहित है। हमारी परंपरा भी हमें इसी धर्मसम्मत आचरण की प्रेरणा देती है।" उन्होंने संस्कृत श्लोक, "लोकपालाश्च ते सर्वे वासवप्रमुखास्तथा।

ऋतवः षट् च ते सर्वे मासाः संवत्सराः क्षपाः॥ दिनानि च मुहूर्ताश्च स्वस्ति कुर्वन्तु ते सदा। श्रुतिः स्मृतिश्च धर्मश्च पातु त्वां पुत्र सर्वतः॥" भी साझा किया था।

जिसका हिंदी अर्थ है कि प्रकृति और धर्म के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन ही सुख, सुरक्षा और मंगल का आधार है। अतः दिशाओं के रक्षक देवता, इंद्र आदि प्रमुख देवगण, छह ऋतुएं, सभी मास, वर्ष, रात्रियां, दिन और शुभ मुहूर्त सदैव कल्याणकारी हों।

वेद, स्मृतियां और धर्म भी सभी प्रकार से सर्वत्र सबकी रक्षा करें।

सोमवार को प्रधानमंत्री की ओर से 'एक्स' पोस्ट में संस्कृत श्लोक, शीलवान् पूजितो लोके, शीलवान् साधुसम्मतः। शीलवान् सर्वकर्मार्हः, शीलवान् प्रियदर्शनः॥ शेयर किया गया था।

जिसका हिंदी अर्थ है, "सदाचारी मनुष्य समाज में प्रतिष्ठा और सज्जनों का आदर प्राप्त करता है।

उत्तम चरित्र से युक्त व्यक्ति अपने सत्यनिष्ठा, विनम्र, और मर्यादित आचरण के कारण प्रत्येक उत्तरदायित्व के योग्य माना जाता है; उसका व्यक्तित्व सभी के लिए आकर्षक और अनुकरणीय होता है। वास्तव में, सफलता, प्रभावी नेतृत्व, और अटूट विश्वास का वास्तविक आधार उत्तम चरित्र ही है।"

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