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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:35 · नई दिल्ली संस्करण

पेजेश्कियन बोले- इस्लामिक क्रांति के बाद पहली बार इतने मुश्किल हालात का सामना कर रहा ईरान

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
पेजेश्कियन बोले- इस्लामिक क्रांति के बाद पहली बार इतने मुश्किल हालात का सामना कर रहा ईरान

ईरान और ओमान के बीच होर्मुज स्ट्रेट से एक सुरक्षित कमर्शियल शिपिंग रूट बनाने पर बातचीत लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। इस बीच, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने देश के लिए वर्तमान समय को काफी मुश्किल भरा बताया और कहा कि प्रतिबंधों और सैन्य टकराव का दबाव बढ़ता जा रहा है।

वहीं, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी इस बात की पुष्टि की है कि ईरानी शासन बिखरा हुआ है, जिसकी वजह से दोनों देशों के बीच डील की प्रक्रिया मुश्किल भरी रहेगी।

राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन का कहना है कि ईरान पर पाबंदियों और लड़ाई का दबाव बढ़ता जा रहा है और उन्होंने मौजूदा समय को 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद सबसे मुश्किल समय बताया।

अपने शपथ ग्रहण की दूसरी सालगिरह पर बुधवार को सरकारी मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में पेजेश्कियन ने कहा कि पाबंदियां लगातार बढ़ रही हैं और उसके बाद सैन्य टकराव हुआ है। पेजेश्कियन ने आधिकारिक इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (आईआरआईबी) को बताया, “अभी हम जिन हालात का सामना कर रहे हैं, वे क्रांति के बाद के इतिहास के सबसे मुश्किल हालात हैं।

पाबंदियां थीं और वे बढ़ती गईं। फिर, उन्होंने हमारे बैंकों और हमारे फाइनेंशियल ऑपरेशन्स पर पाबंदी लगा दी। इससे खुश नहीं होने पर उन्होंने जंग छेड़ दी।”

ईरान के राष्ट्रपति ने टीवी पर दिए इंटरव्यू में कहा कि बाहरी दबाव का मकसद सरकार के लिए लोगों का समर्थन कमजोर करना है।

उन्होंने दावा किया, “अब वे जो भी योजना बना रहे हैं और जो भी दबाव डाल रहे हैं, वह लोगों को नाराज करने और जैसा कि वे कहते हैं, उन्हें विरोध करने के लिए उकसाने के लिए है।”

पेजेश्कियन ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय एकता ने ईरान को दबाव झेलने में मदद की है। उन्होंने कहा, “अगर हम आज तक बचे हैं तो इसका श्रेय ईरान के अच्छे लोगों को जाता है।”

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बुधवार को ईरान के साथ संभावित समझौते को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर बातचीत आसान नहीं होगी और इसमें काफी समय लग सकता है। वेंस के मुताबिक ईरानी बेहद जटिल लोग हैं और वहां का शासन तंत्र बिखरा हुआ है, जिसकी वजह से डील की प्रक्रिया मुश्किल भरी रहेगी।

बुधवार शाम को फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “हमारा काम इससे निपटना है और अमेरिकी लोगों के लिए, बल्कि अमेरिका के राष्ट्रपति के लिए भी सबसे अच्छा नतीजा पाना है। तेल की कीमतें नीचे आएंगी और नीचे ही रहेंगी। ईरान के पास कभी परमाणु हथियार नहीं होगा और अमेरिका एक मजबूत स्थिति में होगा।”

इसके अलावा ईरानी प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने यह भी बताया कि इस हफ्ते के अंत में तेहरान के किसी भी वरिष्ठ अधिकारियों के पाकिस्तान या कतर जाने की कोई योजना नहीं है।

ईरानी विदेश मंत्रालय की प्रेस रिलीज के अनुसार,ईरान और ओमान के बीच प्रस्तावित रूट के भौगोलिक समन्वय पर सहमति बन गई है और वे एक संयुक्त बयान को फाइनल कर रहे हैं जिसमें तय किए गए खास पॉइंट्स बताए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि दोनों देश पिछले दो महीनों से प्रस्तावित रास्ते पर बातचीत कर रहे हैं, जिसमें ईरानी अधिकारी तकनीकी, कानूनी, सुरक्षा और पर्यावरण से जुड़े पहलुओं की समीक्षा कर रहे हैं।

बाघेई ने कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के सैन्य हमले और उसके कारण इलाके की सुरक्षा पर पड़ने वाले असर के कारण स्ट्रेट को बंद कर दिया गया था।

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