गोपाल खेमका की हत्या से दहला पटना: नीतीश सरकार के ‘सुशासन’ की खुली पोल

गोपाल खेमका की हत्या से दहला पटना: नीतीश सरकार के ‘सुशासन’ की खुली पोल
पटना में उद्योगपति की हत्या, अपराधियों का डर नहीं:प्रशासन लापता
राजधानी पटना में शुक्रवार रात एक बार फिर गोलियों की गूंज सुनाई दी। इस बार निशाना बने बिहार के प्रतिष्ठित उद्योगपति गोपाल खेमका, जिन्हें पटना क्लब से लौटते वक्त अपराधियों ने अपार्टमेंट के गेट पर गोली मार दी। यह घटना राजधानी के हाई-सिक्योरिटी ज़ोन गांधी मैदान थाना क्षेत्र में हुई, जहाँ पुलिस की गश्ती हमेशा दिखावटी होती है। इस निर्मम हत्या ने स्पष्ट कर दिया कि अब बिहार में अपराधियों को कानून और सरकार का कोई भय नहीं बचा।
नीतीश सरकार की विफल कानून व्यवस्था: हत्या के बाद डेढ़ घंटे तक नहीं पहुंची पुलिस
सबसे शर्मनाक पहलू यह रहा कि गोली चलने और अफरा-तफरी मचने के बावजूद गांधी मैदान थाना की पुलिस को मौके पर पहुँचने में डेढ़ घंटे लग गए। वहीं, सिटी एसपी भी दो घंटे बाद पहुंचीं। एक बड़े उद्योगपति की हत्या के बाद अगर पुलिस की यही प्राथमिकता हो, तो आम जनता की सुरक्षा की कल्पना ही डरावनी हो जाती है। परिजनों ने साफ कहा कि “बिहार में अब कोई सुरक्षित नहीं है, पुलिस सिर्फ कागज़ी कार्रवाई में मशगूल है।”
छह साल पहले बेटे की हत्या, अब खुद मारे गए:क्या यही है 'सुशासन' मॉडल?
गौर करने वाली बात यह है कि छह साल पहले गोपाल खेमका के बेटे गुंजन खेमका की भी वैशाली जिले में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय भी अपराधियों को पकड़ने में महीनों लग गए थे और मामला ठंडे बस्ते में चला गया। अब खुद गोपाल खेमका को मारा गया। यह घटना केवल एक हत्या नहीं, बल्कि नीतीश कुमार की उस ‘सुशासन’ सरकार पर करारा तमाचा है जो हर मोर्चे पर विफल नजर आ रही है।
नीतीश मॉडल में अपनों की जान तक सुरक्षित नहीं: अपराधी घर में घुसकर मार रहे
परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा है। उनका कहना है कि “इस सरकार में कोई भी सुरक्षित नहीं है। अब तो अपराधी घर में घुसकर, गाड़ी से उतरते ही गोली मार रहे हैं।” यह सिर्फ भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक कड़वा यथार्थ है। नीतीश कुमार के राज में कानून व्यवस्था रसातल में जा चुकी है और अपराधी बेलगाम होकर घूम रहे हैं। पुलिस प्रशासन मात्र तमाशबीन बनकर रह गया है।
व्यवसायियों में दहशत, बिहार में निवेश का वातावरण खत्म
गोपाल खेमका कोई सामान्य व्यक्ति नहीं थे, वे वर्षों तक मगध हॉस्पिटल जैसे प्रतिष्ठान के मालिक रह चुके थे और उद्योग जगत में उनका सम्मान था। ऐसे व्यक्ति की सरेआम हत्या न सिर्फ समाज में भय का वातावरण बनाती है, बल्कि बिहार में निवेश और उद्योग के लिए भी घातक संकेत देती है। इससे साफ होता है कि नीतीश सरकार के राज में व्यवसायी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और राज्य निवेश के लिए अनुपयुक्त बनता जा रहा है।
सीसीटीवी फुटेज और बयानबाज़ी तक सीमित पुलिस: अपराधी बेखौफ
घटना के बाद पुलिस अधिकारियों का बयान आया कि "सिर के पास से गोली मारी गई है, सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।" सवाल यह है कि क्या बिहार पुलिस अब सिर्फ फुटेज देखने और प्रेस बयान जारी करने तक सीमित रह गई है? जहां अपराधी योजनाबद्ध तरीके से उद्योगपतियों की हत्या कर रहे हैं, वहां पुलिस की निष्क्रियता इस सरकार की सबसे बड़ी विफलता है।
SIT का गठन किया:
बिहार की राजधानी पटना में शुक्रवार देर रात हुई उद्योगपति गोपाल खेमका की हत्या ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया है. गांधी मैदान थाना क्षेत्र के रामगुलाम चौक के पास गोपाल खेमका की गोली मार कर हत्या कर दी गई. घटनास्थल से गांधी मैदान थाना की दूरी महज 600 मीटर है. इसके बावजूद पुलिस समय पर नहीं पहुंच सकी, जिस पर परिवार और स्थानीय लोगों ने गहरी नाराजगी जताई है. वहीं अब गोपाल खेमका हत्याकांड को लेकर DGP विनय कुमार ने IG जितेंद्र राणा और SSP कार्तिके शर्मा से बात की. DGP के आदेश के बाद वारदात की गुत्थी जल्द सुलझाने को लेकर SIT का गठन किया गया है.
नीतीश सरकार का ढहता भरोसा:बिहार अपराधियों की शरणस्थली बन चुका है
गोपाल खेमका की हत्या केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं है, यह नीतीश सरकार की सड़ी-गली प्रशासनिक व्यवस्था और खोखली कानून व्यवस्था की शवयात्रा है। अब जनता यह सोचने पर मजबूर है कि क्या इस सरकार में कोई सुरक्षित है? क्या अब केवल अपराधियों का ही शासन है? बिहार, जो एक समय विकास की दिशा में बढ़ रहा था, आज फिर उसी अंधेरे गर्त में डूबता दिख रहा है, जहां से निकलने के लिए उसे एक सशक्त और जवाबदेह नेतृत्व की ज़रूरत है।





