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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:39 · नई दिल्ली संस्करण

बीकानेर की गोचर की भूमि अब स्पेशल पैराफेरी जोन में, आंदोलन स्थगित

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
बीकानेर की गोचर की भूमि अब स्पेशल पैराफेरी जोन में, आंदोलन स्थगित

बीकानेर। संभाग मुख्यालय पर गाेचर भूमि के संरक्षण के लिए दिया जाने वाला बड़ा धरना अब स्थगित कर दिया गया है। यह भूमि गोचर की भूमि अब बीकानेर विकास प्राधिकरण और जिला कलेक्टर के अधीन नहीं रहेगी। ये जमीन स्पेशल पैराफेरी जोन में रहेगी। इसके लिए राज्य सरकार ने एक आदेश भी जारी कर दिया है, जिसमें इस भूमि के बारे में कोई भी निर्णय राज्य सरकार की अनुमति के बिना नहीं होगी।भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष बिहारी लाल बिश्नाेई और जिले के विधायकों ने शनिवार काे सर्किट हाऊस में पत्रकाराें से बातचीत में यह जानकारी दी है। इस अवसर पर बीकानेर पश्चिम विधायक जेठानंद व्यास, पूर्व क्षेत्र से विधायक सिद्धीकुमारी, श्रीकाेलायत विधायक अंशुमान सिंह, खाजूवाला विधायक डाॅ. विश्वनाथ माैजूद थे। उनके पास ही बैठे राष्ट्रीय संत सरजूदास ने आंदोलन स्थगित करने की घाेषणा की है।दरअसल, धरने से दो दिन पहले सरकार ने ये निर्णय लेकर 27 जनवरी को प्रस्तावित धरने को स्थगित करवाने के लिए साधु-संतों से आग्रह किया था। इसके बाद साधुसंतों ने इसे स्थगित कर दिया है। गोचर भूमि के मुद्दे पर भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बिहारी लाल बिश्नोई ने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने साफ किया है कि गोचर भूमि को बीकानेर विकास प्राधिकरण (बीडीए) के अधिकार क्षेत्र से बाहर रखा जाएगा। इस भूमि को लेकर जिला कलेक्टर भी कोई स्वतंत्र निर्णय नहीं ले सकेंगे।बिहारी बिश्नोई ने बताया कि मास्टर प्लान की आपत्तियों से जुड़ा एक पत्र सामने आया है, जिसमें अधिकांश आपत्तियां सरेहनथानियां गोचर से संबंधित हैं। यह गोचर करीब 5 हजार 418 हेक्टेयर भूमि क्षेत्र में फैला हुआ है। उन्होंने कहा कि आमजन की भावना को ध्यान में रखते हुए संबंधित गोचर भूमि को विशेष भूमि के रूप में चिह्नित किया जाएगा। भविष्य में इस क्षेत्र में किसी भी तरह के विकास संबंधी फैसलों पर रोक रहेगी। राज्य सरकार की अनुमति के बिना कोई भी निर्णय नहीं लिया जाएगा और इस भूमि का मालिकाना हक भी राज्य सरकार के पास ही रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले से बन रहे इलेक्ट्रिक बस स्टैंड के निर्माण को लेकर फिलहाल कोई नया निर्णय नहीं किया गया है।सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद साधु-संतों ने 27 जनवरी को प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन को स्थगित करने का निर्णय लिया है। गोचर भूमि को लेकर सरकार के रुख के बाद फिलहाल आंदोलन टल गया है।

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