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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 7:08 · नई दिल्ली संस्करण

परिवर्तिनी एकादशी: भगवान विष्णु की कृपा से दूर होंगी विवाह में आ रही अड़चनें, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और उपाय

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन

नई दिल्ली। हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन को लेकर धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु जो चातुर्मास में योगनिद्रा में लीन रहते हैं, वे इस दिन करवट बदलते हैं। इसी कारण इसे परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है।

ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को श्रद्धा और विधिपूर्वक करने से पुराने से पुराने संकट दूर हो सकते हैं। विवाह में आ रही रुकावटें भी इसी दिन दूर हो सकती हैं।

इस साल परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 3 सितंबर को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि का आरंभ 3 सितंबर को सुबह 3 बजकर 53 मिनट पर होगा और यह तिथि अगले दिन 4 सितंबर को सुबह 4 बजकर 21 मिनट तक रहेगी। व्रत का पारण यानी समापन 4 सितंबर को दोपहर 1 बजकर 36 मिनट से शाम 4 बजकर 7 मिनट के बीच किया जा सकता है।

खास बात यह है कि इस साल यह एकादशी तीन शुभ योगों आयुष्मान योग, सौभाग्य योग और रवि योग में पड़ रही है। इन शुभ संयोगों के कारण इस व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है। आयुष्मान योग दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य का संकेत देता है, सौभाग्य योग घर-परिवार में सुख-शांति लाता है और रवि योग जीवन से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने वाला माना जाता है।

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, साफ-सुथरे कपड़े पहनें और घर के मंदिर को गंगाजल से शुद्ध करें। भगवान विष्णु की मूर्ति के सामने घी का दीपक जलाएं और उन्हें पीले फूल, ऋतु फल, पंचामृत, तुलसी दल और पीले वस्त्र अर्पित करें। 'ऊं नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें। पूरे दिन मन को शांत रखते हुए फलाहार करें या निर्जल व्रत रखें और रात को भगवान के भजन-कीर्तन करें।

अगले दिन द्वादशी तिथि को सूर्योदय के बाद व्रत का पारण किया जाता है।

इस एकादशी का संबंध विवाह में आ रही बाधाओं से है। कई बार जीवन में ऐसा होता है कि अच्छे रिश्ते बनने के बावजूद बात कहीं न कहीं अटक जाती है। कुंडली में गुरु या शुक्र ग्रह की स्थिति कमजोर होती है या किसी कारण से रिश्ता पक्का नहीं हो पाता।

ऐसी स्थिति में परिवर्तिनी एकादशी का व्रत वरदान समान माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करने के बाद अगर किसी गरीब को पीले वस्त्र, चने की दाल और पीली मिठाई का दान किया जाए, तो विवाह में आ रही रुकावटें दूर होने लगती हैं। जिन युवाओं की शादी में बार-बार अड़चनें आती हैं, उन्हें यह उपाय विशेष रूप से करना चाहिए।

मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से किए गए छोटे-छोटे उपाय भी बड़ा असर करते हैं।

परिवर्तिनी एकादशी के दिन कुछ विशेष उपाय भी बताए गए हैं, जिन्हें करके जीवन की अन्य समस्याओं से भी मुक्ति मिल सकती है। जैसे कि इस दिन तुलसी के पास घी का दीपक जलाना और उसकी 5 या 7 परिक्रमा करना घर में सुख-समृद्धि बढ़ाता है। भगवान विष्णु को पीला वस्त्र और पीले पुष्प चढ़ाना करियर में आ रही बाधाओं को दूर करता है। शाम को पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाकर दीपक जलाने से आर्थिक संकट दूर होते हैं और पितृ दोष का नाश होता है। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और फल दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और घर में शांति बनी रहती है।

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