बड़ा खतरा! पैरासिटामोल और बीपी की दवा गुणवत्ता जांच में नाकाम, स्वास्थ्य विभाग ने लगाई रोक

देश में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) और अन्य स्वास्थ्य एजेंसियों द्वारा किए गए रूटीन क्वालिटी टेस्ट में आम इस्तेमाल की जाने वाली दो प्रमुख दवाइयां—पैरासिटामोल और ब्लड प्रेशर की एक अहम दवा—गुणवत्ता के पैमानों पर खरी नहीं उतर पाईं। इन दवाओं के सैंपल जांच के दौरान सब-स्टैंडर्ड (घटिया) पाए गए हैं, जिसके बाद देश भर के सरकारी और निजी अस्पतालों में इन दवाओं के इस्तेमाल पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।
स्वास्थ्य मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, यह समस्या तब सामने आई जब भारत देश के विभिन्न राज्यों से दवा के नमूनों को कलेक्ट कर उनकी प्रयोगशालाओं में जांच की गई है। रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई कि इन दवाओं में इस्तेमाल किए जाने वाले सॉल्ट का अनुपात तय मानकों के अनुरूप में नहीं था। पैरासिटामोल जैसी बहुतायत में इस्तेमाल होने वाली दर्द निवारक और बुखार की दवा का फेल होना आम जनता की सेहत के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है। इसके अलावा, उच्च रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) जैसी गंभीर बीमारी के लिए नियमित रूप से ली जाने वाली दवा का असरदार न होना मरीजों की जान जोखिम में डाल सकता है।
इस खुलासे के बाद ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने संबंधित दवा निर्माताओं और वितरकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अस्पतालों और मेडिकल स्टोरों को यह सुनिश्चित करने के भी लिए कहा गया है कि वे इन बैच की दवाओं की बिक्री तुरंत बंद करें और मरीजों को इनका वितरण न किया जाए। डॉक्टरों का कहना है कि घटिया या अप्रभावी दवाइयों के सेवन से न केवल बीमारी ठीक होने में देरी होती है, बल्कि साइड इफेक्ट्स का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग इस बात की जांच कर रहा है कि ये सब-स्टैंडर्ड दवाएं बाजार में कैसे पहुंचीं और इस लापरवाही के पीछे कौन लोग जिम्मेदार हैं। इस घटना ने देश में दवा विनिर्माण इकाइयों की गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली की पारदर्शिता और निगरानी पर एक बार फिर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।





