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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:43 · नई दिल्ली संस्करण

चीन के लिए हथियारों का 'गेटवे' बना पाकिस्तान, रिपोर्ट में बड़ा दावा

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
चीन के लिए हथियारों का 'गेटवे' बना पाकिस्तान, रिपोर्ट में बड़ा दावा

वाशिंगटन। चीन अपने रणनीतिक हित साधने के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल एक माध्यम के रूप में कर रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान और लीबियाई नेशनल आर्मी के बीच 16 जेएफ-17 लड़ाकू विमानों, प्रशिक्षण विमानों और अन्य सैन्य उपकरणों से जुड़ा 4 अरब डॉलर से अधिक का रक्षा सौदा इसी रणनीति का उदाहरण है।

अमेरिका स्थित थिंक टैंक 'मिडिल ईस्ट फोरम' की एक रिपोर्ट में चीन को लेकर ये खुलासा किया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस सौदे से लीबिया पर संयुक्त राष्ट्र के हथियार प्रतिबंध कमजोर पड़ सकते हैं, देश के आंतरिक संघर्ष का सैन्य संतुलन बदल सकता है और क्षेत्रीय भू-राजनीतिक तनाव बढ़ सकता है।

थिंक टैंक के अनुसार, हाल के वर्षों में पाकिस्तान और चीन के बीच रक्षा, सुरक्षा और खुफिया सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसआईपीआरआई) के आंकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2021 से 2024 के बीच पाकिस्तान के 80 प्रतिशत से अधिक हथियार चीन से आयात हुए थे, जिससे पाकिस्तान की बढ़ती निर्भरता और उसके रक्षा क्षेत्र में चीन की मजबूत होती मौजूदगी का संकेत मिलता है।

रिपोर्ट के अनुसार, "पाकिस्तान अब भी अमेरिकी मूल के एफ-16 फाइटिंग फैल्कन विमानों का उपयोग करता है और समय-समय पर अमेरिका से सैन्य सहायता भी प्राप्त करता है, लेकिन उसकी सैन्य क्षमता का बड़ा हिस्सा अब चीनी मूल के हथियारों पर आधारित है।

पाकिस्तान, चीन के साथ संयुक्त रूप से निर्मित जेएफ-17 लड़ाकू विमान के साथ-साथ चीनी ड्रोन, एचक्यू-9 वायु रक्षा प्रणाली और अन्य रक्षा उपकरणों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है।"

रिपोर्ट के अनुसार, हाल के महीनों में इराक, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, सऊदी अरब, लीबिया, मोरक्को, नाइजीरिया, सूडान और इथियोपिया जैसे देशों के साथ पाकिस्तान की रक्षा वार्ताओं और संभावित सौदों की संख्या बढ़ी है।

चीनी मीडिया में भी यह दावा किया गया है कि पाकिस्तान इनमें से कई देशों के साथ जेएफ-17 विमानों के सौदों को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहा है।

सऊदी अरब के साथ संभावित समझौते के तहत पाकिस्तान जेएफ-17 विमान उपलब्ध कराने के बदले वित्तीय व्यवस्था कर सकता है, हालांकि ऐसा कोई सौदा अब तक नहीं हुआ है।

इसके पीछे चीनी हथियारों की गुणवत्ता, अमेरिकी प्रणालियों के साथ उनका तालमेल और वित्तीय पहलुओं को कारण बताया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है, "इसके बावजूद चीन पाकिस्तान का इस्तेमाल इस क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए एक गेटवे के तौर पर कर रहा है।

वहीं, पाकिस्तान द्वारा इन रक्षा प्रणालियों को बढ़ावा दिए जाने से चीन की व्यापक रक्षा-औद्योगिक मौजूदगी और उसकी रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं को भी बल मिल रहा है।”

थिंक टैंक का निष्कर्ष है कि चीन पाकिस्तान के माध्यम से पश्चिम एशिया के रक्षा बाजार में अपनी उपस्थिति बढ़ाने की कोशिश कर रहा है और पाकिस्तान द्वारा चीनी हथियारों का प्रचार-प्रसार, बीजिंग की व्यापक रक्षा-औद्योगिक और रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं को आगे बढ़ाने में मदद करता है।

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