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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:40 · नई दिल्ली संस्करण

संस्कृति एवं संस्कारों का संवहन राष्ट्र निर्माण के लिए सर्वोपरि: निवेदिता भिडे

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
संस्कृति एवं संस्कारों का संवहन राष्ट्र निर्माण के लिए सर्वोपरि: निवेदिता भिडे

बांसवाड़ा। गायत्री मंडल द्वारा पीताम्बरा आश्रम में आयोजित एक विशेष समारोह में विवेकानंद केंद्र, कन्याकुमारी की अखिल भारतीय उपाध्यक्ष एवं सुप्रसिद्ध आध्यात्मिक चिंतक निवेदिता रघुनाथ भिड़े का स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। इस दिव्य समागम की अध्यक्षता श्री बड़ा रामद्वारा के संत रामप्रकाश रामस्नेही महाराज ने की।मुख्य वक्ता के रूप में अपने उद्बोधन में निवेदिता दीदी ने सामाजिक चेतना और राष्ट्र जागरण पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और सनातन परंपराओं से युवा पीढ़ी को जोड़ना आज की महती आवश्यकता है। पाश्चात्य संस्कृति के बढ़ते प्रभाव के बीच युवाओं को संस्कारवान बनाकर ही एक समृद्ध और दिव्य राष्ट्र का निर्माण संभव है। उन्होंने आह्वान किया कि हमें हर स्तर पर और हर अवसर का उपयोग करते हुए निष्ठापूर्वक राष्ट्र सेवा में जुटना चाहिए।दीदी ने सनातन धर्म की विलक्षणता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह एकमात्र ऐसा धर्म है जो ईश्वर को सर्वत्र देखता है और 'विश्व मंगल' की कामना करता है। उन्होंने रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद के जीवन दर्शन का उदाहरण देते हुए समझाया कि ईश्वर एक ही है, जिसे विभिन्न रूपों में पूजा जाता है। उन्होंने जोर दिया कि नई पीढ़ी को कर्मकांड के साथ-साथ उसके पीछे छिपे मूल तत्व ज्ञान को भी समझाना जरूरी है।विवेकानंद केंद्र की गतिविधियों पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि केंद्र अध्यात्म से प्रेरित होकर हिंदू समाज को संगठित, संस्कारी और संवेदनशील बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। समारोह में उपस्थित क्षेत्रीय प्रतिनिधियों ने केंद्र द्वारा संचालित जनजातीय सेवा प्रकल्पों और अन्य सेवा कार्यों की विस्तृत जानकारी साझा की।इस अवसर पर गायत्री मंडल के कोषाध्यक्ष अनंत जोशी ने मंडल की आध्यात्मिक गतिविधियों का परिचय दिया। कार्यक्रम में शीतल दीदी, प्रांत प्रमुख भगवान जी, डॉ. गंगाहरि दिवाकर, शकुंतला दीदी, भूपेंद्र भैया और कई समर्पित कार्यकर्ता उपस्थित थे। अंत में, निवेदिता दीदी ने पीताम्बरा आश्रम की गतिविधियों की सराहना करते हुए सभी से अनुकरणीय आचरण और नित्य नियमों के पालन का संकल्प लेने का आग्रह किया।

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