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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:43 · नई दिल्ली संस्करण

बालाघाट में रहस्यमयी बीमारी का प्रकोप, आठ बच्चों ने गंवाई जान

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
बालाघाट में रहस्यमयी बीमारी का प्रकोप, आठ बच्चों ने गंवाई जान

- कारण नहीं ढूंढ पाए डॉक्टर, पुणे भेजे गए सैंपल

भोपाल। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी इलाकों में रहस्यमयी बीमारी के चलते 26 जून से अब तक आठ बच्चों की मौत हो चुकी है। इनमें से एक बच्चे की मौत मंगलवार की रात ही हुई है। जबलपुर मेडिकल कॉलेज और बालाघाट के डॉक्टरों की टीम ने प्रभावित इलाकों का दौरा किया, लेकिन मौतों की असली वजह का अब तक पता नहीं चल पाया है।

दरअसल, बालाघाट जिले की अडोरी और मछुरदा पंचायत के बैगा बहुल आदिवासी इलाकों में पिछले दो माह से अज्ञात बीमारी से सैकड़ों बच्चे बीमार हो चुके हैं। इसी बीमारी से पीड़ित तीन वर्षीय प्रियंका धुर्वे 09 अगस्त को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, उसने 11 अगस्त की रात इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इसके साथ ही क्षेत्र में इस बीमारी से जान गंवाने वाले बच्चों की संख्या आठ हो गई है। सिविल सर्जन डॉ. निलय जैन के मुताबिक, बच्ची कई बीमारियों से ग्रसित थी।

जबलपुर से जांच के लिए पहुंची टीम ने बताया कि बीमार बच्चों में न्युमोनिया, एनीमिया यानी खून की कमी, डिहाइड्रेशन, बुखार, खुजली, मलेरिया और किडनी पर असर जैसे लक्षण मिले हैं। सैंपल पुणे की लैब में भेजे गए हैं। इसकी रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। हालांकि, यह रिपोर्ट कब तक आएगी, इस पर स्वास्थ्य विभाग कुछ भी बोलने से बच रहा है।

सिविल सर्जन डॉ. निलय जैन ने बताया कि सभी बच्चे अडोरी और मछुरदा पंचायत के गांवों के रहने वाले थे। 26 जून से 22 जुलाई तक बोंदारी निवासी भाई-बहन लमनिन और साहिल, पूजा, सचिन और कुंडेकसा निवासी प्रीति की मौत हुई। वहीं, 6 अगस्त को अरविंद और 8 अगस्त को मंगली मरकाम की जान गई। प्रियंका धुर्वे ने भी 11 अगस्त की रात उसने दम तोड़ दिया। बच्ची कई बीमारियों से जूझ रही थी और उसे बचाने की पूरी कोशिश की गई थी।

आदिवासी इलाकों में बच्चों की लगातार मौतों पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है। उन्होंने मामले की राज्यस्तरीय जांच कराने, जिम्मेदार अफसरों पर सख्त कार्रवाई करने और मृत बच्चों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये की सहायता राशि देने की मांग की है। दिग्विजय ने बीमार बच्चों को एयरलिफ्ट कर नागपुर, रायपुर और भोपाल के बड़े अस्पतालों में भर्ती कराने और इलाज का पूरा खर्च सरकार की ओर से उठाने की बात भी कही है।

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