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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 6:24 · नई दिल्ली संस्करण

मनोज जरांगे के मुंबई आगमन पर संजय राउत ने कहा, 'न्यायिक मांग में कोई राजनीति नहीं'

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन

मुंबई। मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे के हजारों समर्थकों के साथ मुंबई आने पर शिवसेना (यूबीटी) के नेता एवं राज्यसभा सांसद संजय राउत ने शुक्रवार को अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे राजनीति से न जोड़ने की अपील की और प्रदेश सरकार को संयम बरतने की नसीहत भी दी।

शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा, "मुंबई महाराष्ट्र और मराठी लोगों की राजधानी है। महाराष्ट्र के कोने-कोने से मराठी लोग अपने हक के लिए मुंबई आए हैं। मुंबई की कानून और व्यवस्था बनाए रखना कोर्ट का काम नहीं है; अगर कोई इसे कोर्ट के भरोसे छोड़ रहा है, तो यह गलत है। यह सरकार और राज्य के गृह विभाग का काम है, खासकर मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी है।"

उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री ने अप्रत्यक्ष रूप से कहा है कि कोई जरांगे पाटिल के कंधे पर बंदूक रखकर राजनीति कर रहा है। एक समाज अगर अपनी न्यायिक मांग को लेकर महाराष्ट्र की राजधानी में आया है, तो इसमें राजनीति क्या दिख रही है? जब भी आप (भाजपा) सत्ता में आए हैं, आपने इस आरक्षण मुद्दे को हवा दी है और इसका राजनीतिक लाभ उठाया है। मिस्टर फडणवीस, अगर आज कोई जरांगे पाटिल के कंधे पर बंदूक रखकर राजनीति कर रहा है, तो आप बताइए कि वह कौन है? वह आपकी सरकार में है या विपक्ष में है, या क्या वह आपकी कैबिनेट का हिस्सा है?"

उन्होंने कहा, "मुंबई में इतनी बड़ी संख्या में मराठी लोग आ रहे हैं, हम उनका स्वागत करते हैं क्योंकि पिछले कुछ समय से मुंबई में मराठी आवाज कमजोर हो रही है। अगर इस समय मराठी लोग अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर आ रहे हैं, तो मुंबई के दुश्मनों को यह ताकत दिखनी चाहिए।"

गणेशोत्सव में आंदोलन को लेकर राउत ने कहा, "लाखों की संख्या में मराठा समाज के लोग मुंबई में आए हैं, यह सच्चाई है। जरांगे पाटिल आज आजाद मैदान पर डटे हुए हैं। मुंबई में गणपति उत्सव सबसे बड़ा सार्वजनिक त्योहार है। मुझे विश्वास है कि हमारे ये सभी मराठी भाई गणेशोत्सव में बिना कोई खलल डाले आंदोलन करेंगे। अगर सरकार ने इस आंदोलन को दबाने की कोशिश की, तो हालात बिगड़ सकते हैं, क्योंकि मनोज जरांगे पाटिल दबाव में आने वाले व्यक्ति नहीं हैं। उन्होंने आमरण अनशन की चेतावनी दी है, इसलिए सरकार को बेहद संयम से बातचीत कर समाधान निकालना चाहिए। मैं इसे समस्या न कहकर मांग कहूंगा, जिस पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।"

उन्होंने कहा, "सरकार के पास इस स्थिति से निपटने के लिए कोई योजना नहीं है। अगर कोई योजना होती, तो मराठवाड़ा में ही मनोज जरांगे पाटिल से बात की जाती, उन्हें रोका जाता। सरकार की ओर से कोई अधिकारी नहीं गया, मुख्यमंत्री को खुद जाकर बात करनी चाहिए थी। अगर ऐसा होता, तो यह तूफान मुंबई तक नहीं आता।"

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