ओडिशा बंद: छात्रा की मौत पर सड़कों पर गुस्सा, मोहन मांझी सरकार की चुप्पी पर विपक्ष का हमला

ओडिशा बंद: छात्रा की मौत पर सड़कों पर गुस्सा, मोहन मांझी सरकार की चुप्पी पर विपक्ष का हमला
17 जुलाई 2025 | भुवनेश्वर : ओडिशा में आज कांग्रेस और सात अन्य विपक्षी दलों द्वारा बुलाए गए 12 घंटे के राज्यव्यापी बंद ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया। बंद का आह्वान बालासोर की बी.एड छात्रा की आत्मदाह के बाद हुई मौत को लेकर किया गया था, जिसने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। छात्रा ने कथित रूप से यौन उत्पीड़न की शिकायत के बावजूद कॉलेज प्रशासन और पुलिस की बेरुखी से त्रस्त होकर खुद को आग लगा ली थी। उसकी मौत 14 जुलाई को हो गई।
इस दर्दनाक घटना के बाद विपक्षी दलों ने इसे "राजकीय संवेदनहीनता" करार दिया है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने तो इस घटना को "आत्महत्या नहीं, एक संस्थागत हत्या" बताया है।
बंद के दौरान राज्य भर में दुकानें, बाजार, स्कूल-कॉलेज बंद रहे, जबकि प्रमुख राजमार्गों और रेलवे ट्रैक पर प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाकर जाम लगा दिए। बालासोर, भद्रक, कटक और भुवनेश्वर में सड़क यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। रेलवे सेवाएं भी कई घंटों तक बाधित रहीं।
सरकार ने सुरक्षा के लिहाज से 82 से अधिक प्लाटून पुलिस बल तैनात किए थे, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-युक्त ड्रोन कैमरों से निगरानी की गई। इसके बावजूद कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। राजधानी के लोक सेवा भवन के पास तो स्थिति तब बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले दागे।
विपक्ष का आरोप है कि मुख्यमंत्री मोहन मांझी की सरकार केवल सत्ता में आने के बाद राजनीतिक दिखावे और फोटो ऑप्स तक सीमित हो गई है। कांग्रेस ने मांग की है कि छात्रा की मौत की न्यायिक जांच करवाई जाए और राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री, स्थानीय विधायक और सांसद से इस्तीफा लिया जाए।
प्रदर्शनकारियों की एक बड़ी संख्या में छात्र संगठन और महिला मोर्चा की कार्यकर्ता भी शामिल रहीं। उनका कहना है कि "जब सरकार शिक्षा संस्थानों में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकती, तब ऐसी सरकार को सत्ता में रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।"
मुख्यमंत्री मांझी और उनकी कैबिनेट की इस संवेदनशील मुद्दे पर चुप्पी को लेकर आम लोगों में भी नाराजगी देखी जा रही है। राज्य सरकार का अब तक केवल एक सामान्य बयान आया है जिसमें "जांच का आश्वासन" दिया गया है, लेकिन ना किसी को निलंबित किया गया है, न ही पीड़ित परिवार से संवेदना जताई गई है। यह बंद केवल एक छात्रा की त्रासदी को न्याय दिलाने की पुकार नहीं है, बल्कि ओडिशा की भाजपा सरकार को चेतावनी है कि अगर शासन संवेदनशील नहीं होगा, तो जनता सड़कों पर उतरकर जवाब मांगेगी। मुख्यमंत्री मोहन मांझी को अब 'नए चेहरे' के बजाय 'नई संवेदनशीलता' दिखाने की जरूरत है।





