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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:23 · नई दिल्ली संस्करण

एनएसए अजीत डोभाल ने रियाद में उच्च-स्तरीय बातचीत की; द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा पर रहा जोर

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
एनएसए अजीत डोभाल ने रियाद में उच्च-स्तरीय बातचीत की; द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा पर रहा जोर

नई दिल्ली/रियाद। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल रविवार को आधिकारिक दौरे पर रियाद गए। उन्होंने सऊदी अरब के वरिष्ठ नेताओं के साथ कई उच्च-स्तरीय मीटिंग कीं, ताकि आपसी संबंध मजबूत किए जा सकें, ऊर्जा सहयोग बढ़ाया जा सके और इलाके के खास विकास पर चर्चा की जा सके।

एनएसए डोभाल का यह दौरा बदलते भूराजनीतिक हालात के बीच भारत और सऊदी अरब के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को दिखाता है।

रियाद में भारतीय दूतावास ने एक बयान में बताया कि बातचीत में कई मुद्दों पर बात हुई, जिसमें आपसी सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं और आपसी फायदे के मामले शामिल थे।

एनएसए डोभाल ने सऊदी अरब के बड़े नेताओं से मुलाकात की, जिनमें ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान, विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मूसाद अल-ऐबान शामिल थे।

रियाद में भारतीय दूतावास ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस दौरे से संबंधित जानकारी साझा करते हुए लिखा, “एनएसए अजीत डोभाल 19 अप्रैल को रियाद के आधिकारिक दौरे पर आए थे। एयरपोर्ट पर उनका स्वागत राजदूत डॉ. सुहेल खान और राजनीतिक मामलों के मंत्री एम्बेसडर डॉ. सऊद अल-सती ने किया। बाद में, उन्होंने ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान, विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डॉ. मुसैद अल-ऐबान के साथ मीटिंग की। बैठकों के दौरान उन्होंने द्विपक्षीय संबंध, क्षेत्रीय स्थिति और आपसी इंटरेस्ट के दूसरे मुद्दों पर चर्चा की।”

यह दौरा वैश्विक सुरक्षा मामलों पर भारत की एक्टिव डिप्लोमैटिक बातचीत के बीच हो रहा है।

कुछ दिन पहले, 17 अप्रैल को, डोभाल ने यूक्रेन की राष्ट्रीय सुरक्षा और डिफेंस काउंसिल के सचिव रुस्तम उमरोव के साथ लंबी बातचीत की थी।

इस मीटिंग में पूर्वी यूरोप में चल रहे संघर्ष के दौरान नई दिल्ली और कीव के बीच जारी रणनीतिक बातचीत पर जोर दिया गया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के मुताबिक, यूक्रेन के साथ बातचीत में दोनों देशों के रिश्ते और रूस-यूक्रेन विवाद पर फोकस रहा। भारत ने बातचीत और डिप्लोमेसी के ज़रिए शांतिपूर्ण समाधान की वकालत करते हुए अपनी लगातार बात दोहराई।

ये सारी बातचीत भारत के प्रोएक्टिव डिप्लोमैटिक नजरिए को दिखाती हैं, जो क्षेत्रीय और ग्लोबल सुरक्षा चुनौतियों से निपटने और खास अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ संबंध मजबूत करने में मदद करता है।

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