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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:55 · नई दिल्ली संस्करण

धर्मेंद्र प्रधान को हटाए बिना संसद में चर्चा नहीं: राहुल गांधी

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
धर्मेंद्र प्रधान को हटाए बिना संसद में चर्चा नहीं: राहुल गांधी

नई दिल्ली। संसद के मॉनसून सत्र के दौरान कांग्रेस के सांसदों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए स्पष्ट किया कि जब तक उन्हें पद से नहीं हटाया जाता, तब तक इस मुद्दे पर किसी भी चर्चा में भाग नहीं लिया जाएगा। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वीडियो संदेश और फास्ट ट्रैक कोर्ट के सुझाव पर भी विपक्ष ने सवाल उठाए।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पत्रकारों से बात करते हुए आरोप लगाया कि उन्हें सदन में अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया गया। संसदीय परंपरा के अनुसार, यदि किसी सदस्य का नाम लिया जाता है तो उसे जवाब देने का अधिकार होता है लेकिन जब वह केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बयान का जवाब देना चाहते थे, तब उनका माइक बंद कर दिया गया और उन्हें बोलने नहीं दिया गया।

राहुल गांधी ने विपक्ष का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि छात्रों की तीन प्रमुख मांगें हैं। पहली केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाए। दूसरी, छात्रों पर कथित कार्रवाई और हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। तीसरी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।

उन्होंने कहा कि जब तक शिक्षा मंत्री को नहीं हटाया जाता, तब तक विपक्ष किसी चर्चा या बातचीत में हिस्सा नहीं लेगा।

कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि विपक्ष नीट पेपर लीक मामले पर गंभीर बहस और जवाबदेही चाहता है।

सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि भविष्य में प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा संपन्न होने तक पेपर लीक रोकने के लिए क्या ठोस व्यवस्था की जाएगी। उनके अनुसार छात्रों का भरोसा बहाल करने के लिए पारदर्शी और प्रभावी व्यवस्था आवश्यक है। फास्ट-ट्रैक कोर्ट केवल भवन नहीं होते बल्कि उनके लिए न्यायाधीश, कोर्ट मास्टर और अन्य स्टाफ की भी आवश्यकता होती है।

उन्होंने सरकार से पूछा कि इन व्यवस्थाओं को कब पूरा किया जाएगा।

कांग्रेस सांसद नसीर हुसैन ने भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि सभी राजनीतिक दलों, छात्रों और सांसदों का मानना है कि इस पूरे मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि नीट सहित अन्य परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं और छात्रों के खिलाफ हुई कथित हिंसा की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने प्रधानमंत्री के वीडियो संदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश में छात्रों या विपक्ष की ओर से फास्ट-ट्रैक कोर्ट की मांग नहीं उठाई गई थी।

जिन मुद्दों की मांग ही नहीं की गई, प्रधानमंत्री उन पर बात कर रहे हैं जबकि जिन वास्तविक मांगों को लेकर छात्र और विपक्ष आंदोलन कर रहे हैं, उन पर सरकार कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे रही है। विपक्ष की प्राथमिक मांग शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई है।

कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने प्रधानमंत्री से संसद में उपस्थित होकर इस मुद्दे पर विस्तृत बयान देने की मांग की। उन्होंने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में 150 से ज्यादा बार विभिन्न परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं हुईं, लेकिन सरकार ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की।

उन्होंने कहा कि इस विषय को पहले भी संसद में उठाया गया था और जांच समिति बनाने का सुझाव दिया गया था, लेकिन उस पर कोई कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा कि देश के छात्र, अभिभावक और आम नागरिक इस स्थिति से चिंतित हैं तथा पूरे मामले में जवाबदेही तय होना जरूरी है।

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