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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 8:38 · नई दिल्ली संस्करण

निर्मला सीतारमण बोलीं—पीएम मुद्रा योजना से बिना गारंटी लोन देकर छोटे उद्यमियों को मिल रही ताकत

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
निर्मला सीतारमण बोलीं—पीएम मुद्रा योजना से बिना गारंटी लोन देकर छोटे उद्यमियों को मिल रही ताकत

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) देश के छोटे उद्यमियों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रही है। इस योजना के तहत बिना किसी गारंटी के लोन दिया जाता है, जिससे लाखों लोग अपने बिजनेस आइडिया को आसानी से शुरू कर पा रहे हैं।

राज्यसभा में योजना के प्रभाव से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि पीएम मुद्रा योजना के तहत तीन तरह के लोन दिए जाते हैं - शिशु (50,000 रुपए तक), किशोर (50,001 से 5 लाख रुपए तक) और तरुण (5 लाख से 10 लाख रुपए तक)। ये तीनों कैटेगरी अलग-अलग स्तर के कारोबार के लिए हैं, जिससे छोटे और माइक्रो बिजनेस को बढ़ावा मिलता है।

31 मार्च 2025 तक के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, शिशु कैटेगरी में 12.4 प्रतिशत, किशोर में 9.4 प्रतिशत और तरुण में 7.92 प्रतिशत लोन नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (एनपीए) के रूप में दर्ज हैं। बैंकों द्वारा इन लोन की वसूली के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं ताकि योजना को लंबे समय तक टिकाऊ बनाया जा सके।

वित्त मंत्री ने तरुण प्लस कैटेगरी को लेकर भी बात की, जिसमें 20 लाख रुपए तक का बिना गारंटी लोन दिया जाता है।

यह योजना खास तौर पर उन उद्यमियों के लिए है जिन्होंने पहले लिए गए तरुण लोन को समय पर चुका दिया है और अब अपने कारोबार को और बढ़ाना चाहते हैं।

यह नई कैटेगरी केंद्रीय बजट 2024-25 के बाद शुरू की गई थी और अक्टूबर 2024 से लागू हुई है। इस पर उन्होंने कहा कि यह योजना अभी नई है, इसलिए इसके सही असर को देखने के लिए थोड़ा समय देना जरूरी है।

2015 में शुरू हुई पीएम मुद्रा योजना के तहत अब तक 52 करोड़ से ज्यादा लोन दिए जा चुके हैं, जिनकी कुल राशि 32 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है। वहीं, वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 5.5 लाख करोड़ रुपए के अतिरिक्त लोन भी स्वीकृत किए गए हैं।

इस योजना का सबसे बड़ा फायदा महिला उद्यमियों को मिला है, क्योंकि कुल लोन में से करीब 68 प्रतिशत लोन महिलाओं को दिए गए हैं, जिससे महिला सशक्तिकरण और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिला है।

सरकार छोटे कारोबारियों को आसानी से लोन उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रही है, ताकि आत्मनिर्भर भारत और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिल सके।

वित्त मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब वित्तीय क्षेत्र की स्थिति पर चर्चा हो रही है। आंकड़ों के अनुसार, एमएसएमई सेक्टर का कुल एनपीए मार्च 2025 तक करीब 3.6 प्रतिशत रहा, जो मुद्रा योजना के आंकड़ों से कम है।

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