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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 3:15 · नई दिल्ली संस्करण

PMO का फर्जी लेटर और 'स्पेशल ड्यूटी' का झांसा: पीएम मोदी के इवेंट से पहले अरेस्ट रोहन पर नए खुलासे

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
PMO का फर्जी लेटर और 'स्पेशल ड्यूटी' का झांसा: पीएम मोदी के इवेंट से पहले अरेस्ट रोहन पर नए खुलासे

गुजरात के वडोदरा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम 'नमो फॉर विकसित भारत' से ठीक पहले सुरक्षा एजेंसियों ने रोहन नाम के एक संदिग्ध युवक को हिरासत में लिया। प्राथमिक जांच में रोहन पर खुद को 'प्रधानमंत्री कार्यालय' (PMO) का वरिष्ठ अधिकारी बताकर वडोदरा के कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा प्रोटोकॉल को लांघने और वीआईपी वीवीआईपी पास हासिल करने के प्रयास का आरोप लगा। हालांकि, गिरफ्तारी के बाद जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, इस हाई-प्रोफाइल मामले में चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं।

शुरुआती पुलिस पूछताछ और सुरक्षा एजेंसियों के दावों के अनुसार, रोहन के पास से फर्जी पहचान पत्र और संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए थे। उन पर आरोप था कि वह खुद को पीएमओ का प्रतिनिधि बताकर स्थानीय प्रशासन पर अपना प्रभाव जमाने की कोशिश कर रहा था। लेकिन जैसे-जैसे जांच का दायरा बढ़ा है, मामला केवल एक 'फर्जी अफसर' के दुस्साहस का नहीं, बल्कि एक बड़े ठगी सिंडिकेट से जुड़ा प्रतीत हो रहा है।

जांच अधिकारियों के अनुसार, यह संभावना भी गहराई से खंगाली जा रही है कि रोहन खुद किसी बड़े अंतरराज्यीय ठग गिरोह का शिकार हुआ हो। सूत्रों के मुताबिक, रोहन को किसी अज्ञात एजेंसी या बिचौलिए द्वारा पीएमओ में नौकरी दिलाने या विशेष नियुक्ति का फर्जी पत्र थमाया गया था। उस पत्र के आधार पर ही उसे वडोदरा कार्यक्रम की जिम्मेदारी संभालने का भ्रम पैदा किया गया था। पुलिस अब उस गिरोह के मुख्य सरगना की तलाश कर रही है, जिसने जाली दस्तावेज तैयार कर रोहन को झांसे में लिया।

प्रधानमंत्री की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की चूक को बेहद गंभीरता से लिया जाता है। पुलिस प्रशासन और स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) की सतर्कता के कारण रोहन कार्यक्रम स्थल के मुख्य सुरक्षा घेरे में प्रवेश नहीं कर सका। गुजरात पुलिस, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) और केंद्रीय खुफिया एजेंसियां संयुक्त रूप से रोहन से पूछताछ कर रही हैं।

अधिकारियों का कहना है कि रोहन के डिजिटल उपकरणों, मोबाइल फोन और वित्तीय लेनदेन की बारीकी से जांच की जा रही है। जांच का मुख्य केंद्र यह पता लगाना है कि क्या उसकी कोई आपराधिक या राष्ट्रविरोधी मंशा थी, या फिर वह फर्जी नौकरी दिलाने वाले गिरोह के जाल में फंसकर खुद को असली अफसर समझ बैठा था। पुलिस जल्द ही इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने का दावा कर रही है।

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