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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:49 · नई दिल्ली संस्करण

एकता और भाईचारे का संदेश: पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर शेयर किया अथर्ववेद का यह मंत्र

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
एकता और भाईचारे का संदेश: पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर शेयर किया अथर्ववेद का यह मंत्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर एक प्रेरक सुभाषित (वैदिक मंत्र) साझा करते हुए देशवासियों से प्रेम, सद्भाव और आपसी भाईचारे की भावना को मजबूत करने की अपील की है। यह मंत्र अथर्ववेद के तीसरे कांड के 30वें सूक्त का पहला मंत्र है। इसके माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि मनुष्यों को ऐसे कर्म और वचन अपनाने चाहिए जो हृदयों को आपस में जोड़ें, जिससे समाज में सहृदयता, समान मन और द्वेष-रहित वातावरण का निर्माण हो सके।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सामाजिक सौहार्द और मानवीय मूल्यों के महत्व पर जोर देते हुए सोशल मीडिया पर एक प्रेरक सुभाषित साझा किया है। इस वैदिक मंत्र के माध्यम से उन्होंने देशवासियों से प्रेम, सद्भाव और आपसी भाईचारे की भावना को मजबूत करने की अपील की। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि समाज में ऐसे कर्म होने चाहिए जो लोगों के हृदयों को आपस में जोड़ें और परस्पर स्नेह को बढ़ावा दें।

प्रधानमंत्री की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर, सहृदयं सांमनस्यमविद्वेषं कृणोमि वः। अन्यो अन्यमभि हर्यत वत्सं जातमिवाघ्न्या॥ मंत्र साझा किया गया है। इस मंत्र का हिंदी अर्थ है कि मनुष्य को ऐसे कर्म करने चाहिए जो हृदय में प्रेम, सौहार्द्र और सद्भाव को बढ़ाएं। सभी को एक-दूसरे के प्रति उसी प्रकार से स्नेह और आत्मीयता रखनी चाहिए, जिस प्रकार गाय अपने नवजात बछड़े से निस्वार्थ प्रेम करती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा साझा किया गया यह वैदिक मंत्र अथर्ववेद के तीसरे कांड के 30वें सूक्त का पहला मंत्र है। इस पवित्र मंत्र के माध्यम से ईश्वर मनुष्य को संबोधित करते हुए कहते हैं, हे मनुष्यो! मैं तुम्हारे बीच ऐसे वचनों और कर्मों की स्थापना करता हूं जिससे तुम सहृदय (एक जैसा हृदय रखने वाले), सांमनस्य (समान मन वाले), और अविद्वेष (द्वेष या ईर्ष्या से रहित) बनो।

तुम एक-दूसरे से इस प्रकार प्रेम करो, जैसे कोई गाय अपने नवजात बछड़े से अगाध स्नेह करती है। यह मंत्र परिवार, समाज और पूरे राष्ट्र के लोगों के बीच मतभेदों को मिटाकर उन्हें एकता के सूत्र में पिरोने की प्रेरणा देता है। गाय और बछड़े के अनुपम उदाहरण से समझाया गया है कि जैसे गाय बिना किसी स्वार्थ और शर्त के अपने बछड़े से प्रेम करती है, वैसे ही मनुष्यों को भी एक-दूसरे से निःस्वार्थ प्रेम करना चाहिए। इस मंत्र का मूल सार यही है कि सबका उद्देश्य और विचार एक-दूसरे के हित में हो, और यही वैदिक प्रार्थना का भी मूल आधार है। प्रधानमंत्री का यह संदेश मौजूदा समय में सामाजिक एकता और आपसी सद्भाव को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रेरणा देता है।

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