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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:33 · नई दिल्ली संस्करण

एनबीए ने धान अनुसंधान संस्थानों और राज्यों को 8.22 करोड़ रुपये जारी किए

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
एनबीए ने धान अनुसंधान संस्थानों और राज्यों को 8.22 करोड़ रुपये जारी किए

नई दिल्ली। राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने धान अनुसंधान संस्थानों और धान उत्पादक राज्यों को 8.22 करोड़ रुपये जारी किए हैं। यह राशि एक अंतरराष्ट्रीय बीज कंपनी द्वारा भारतीय धान की किस्मों का उपयोग कर संकर विकसित करने और व्यावसायिक रूप से बेचने से प्राप्त हुई है। इसे धान के लिए अब तक की सबसे बड़ी एकल लाभ-साझेदारी वितरण में से एक माना जा रहा है।केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अनुसार, कुल राशि में से 2.47 करोड़ रुपये अनुसंधान संस्थानों को दिए गए हैं, जिन्होंने धान की किस्मों का संरक्षण और साझा किया था। इनमें आईसीएआर-भारतीय धान अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद को 2.43 करोड़ रुपये मिले है, जबकि गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उत्तराखंड को 3.26 लाख रुपये मिले हैं।मंत्रालय ने बताया कि 33 राज्य जैव विविधता बोर्डों और केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों को 5.75 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। यह आवंटन कृषि मंत्रालय के एकीकृत पोर्टल में दर्ज धान उत्पादक क्षेत्र के आधार पर किया गया है। उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक 73 लाख रुपये से अधिक मिले हैं। पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, ओडिशा, छत्तीसगढ़, पंजाब, बिहार, मध्य प्रदेश, असम और आंध्र प्रदेश भी शीर्ष दस राज्यों में शामिल हैं।इन निधियों का उपयोग अनुसंधान संस्थान बीज संग्रहण, जर्मप्लाज्म संरक्षण, अनुसंधान और प्रशिक्षण को मजबूत करने में करेंगे। वहीं, राज्य बोर्ड और परिषदें स्थानीय फसल विविधता संरक्षण, पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन, पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेजीकरण और किसानों व ज्ञानधारकों को सहयोग देने जैसी गतिविधियों में इसका उपयोग करेंगी।एनबीए ने अब तक कृषि और बीज क्षेत्र से लगभग 83 करोड़ रुपये की लाभ-साझेदारी राशि प्राप्त की है। सभी क्षेत्रों में इसकी कुल वितरण राशि 162 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है।

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