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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · रात 2:41 · नई दिल्ली संस्करण

ऑपरेशन 'सिंदूर' के बाद पहले कमांडर सम्मेलन में तैयारियों की समीक्षा करेगी नौसेना

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
ऑपरेशन 'सिंदूर' के बाद पहले कमांडर सम्मेलन में तैयारियों की समीक्षा करेगी नौसेना

- नई दिल्ली में 14 से 16 अप्रैल तक शीर्ष सम्मेलन में राष्ट्रीय समुद्री हितों की रक्षा पर होगी चर्चानई दिल्ली। साल में दो बार होने वाले नौसेना के कमांडर सम्मेलन का पहला हिस्सा 14 अप्रैल से 16 अप्रैल तक नई दिल्ली में होगा। नौसेना भवन में होने वाले इस शीर्ष सम्मेलन में राष्ट्रीय समुद्री हितों की रक्षा, क्षमता विकास और सुरक्षा लक्ष्यों के साथ सामरिक तालमेल के लिए नौसेना के ऑपरेशनल रुख की पूरी समीक्षा की जाएगी। कॉन्फ्रेंस के दौरान होने वाली बातचीत का मकसद भारतीय नौसेना को हिंद महासागर क्षेत्र और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में ‘पसंदीदा सुरक्षा भागीदार’ के तौर पर प्रचारित करना है।पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और हिंद महासागर क्षेत्र में बहुराष्ट्रीय ताकतों के मिलने के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुरक्षित रखने के लिए तेजी से नौसेना की तैनाती को देखते हुए इस कमांडर सम्मेलन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस सम्मेलन का ऑपरेशन 'सिंदूर' के बाद नौसेना के ऑपरेशनल सिद्धांत, इंटर-सर्विसेज कोआर्डिनेशन और तकनीक से चलने वाले प्रतिक्रिया तंत्र को फिर से मजबूत करने में भी खास महत्व है।कॉन्फ्रेंस में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान, गृह सचिव और नौसेना के वरिष्ठ शीर्ष नेतृत्व से बातचीत करेंगे। इसका मकसद इंटर ऑपरेबिलिटी और तालमेल को बढ़ाना, राष्ट्रीय स्थिरता, सुरक्षा वास्तुकला और भविष्य की समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर काम करने के तरीके पर एक बड़ा नजरिया बनाना है। यह फोरम राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ करीबी बातचीत के लिए एक प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करता है, जो नौसेना योजना के लिए सामरिक दिशा तय करता है।नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ऑपरेशनल कमांडरों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मौजूदा भू-रणनीतिक माहौल में बहु-आयामी चुनौतियों से निपटने की समीक्षा और आकलन करेंगे। सुरक्षा से जुड़ी जरूरी बातों के साथ-साथ, बातचीत में अहम ऑपरेशनल सफलता पाने, नीले पानी की क्षमताओं को बढ़ाने, ट्रेनिंग, ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट, सस्टेनेबल मेंटेनेंस प्रैक्टिस, बिना क्रू वाले सिस्टम का असरदार इस्तेमाल, ऑपरेशनल लॉजिस्टिक्स और प्लेटफॉर्म की लड़ाई के लिए तैयार रहने के दूसरे जरूरी तरीकों पर फोकस किया जाएगा।सम्मेलन में नौसेना के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रोडमैप को लागू करने और बिना रुकावट ऑपरेशन के लिए डेटा-संचालित प्रौद्योगिकी पर भी चर्चा की योजना है। नौसेना की तैयारियों की समीक्षा भारतीय समुद्री सिद्धांत में बताई गई चार भूमिकाओं के हिसाब से की जानी है। इसमें लगातार ऑपरेशन, इंटरनेशनल सहयोग बढ़ाने पर फोकस होगा। साथ ही भारत सरकार के सभी क्षेत्रों में सुरक्षा के लिए पारस्परिक और समग्र प्रगति के विजन को आगे बढ़ाने और स्वदेशीकरण की कोशिशें शामिल होंगी।-

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