इस बार हाइब्रिड होगा नौसेना कमांडरों का सम्मेलन, राजनाथ सिंह करेंगे उद्घाटन

- नौसेना कमांडरों की कॉन्फ्रेंस आईएनएस विक्रांत और विक्रमादित्य पर होगी
- दोनों विमानवाहक पोत ‘ट्विन कैरियर ऑपरेशंस’ की क्षमता का प्रदर्शन करेंगे
नई
दिल्ली। नौसेना के कमांडरों का तीन दिवसीय सम्मेलन 05
मार्च से हाइब्रिड प्रारूप में शुरू होगा। यह कमांडर कॉन्फ्रेंस विमानवाहक
पोतों आईएनएस विक्रांत और आईएनएस विक्रमादित्य पर होगी। सम्मेलन का पहला
चरण समुद्र में होगा, जिसके उद्घाटन सत्र में रक्षा मंत्री दोनों विमानवाहक
पोतों को देखने के लिए समुद्र में उतरेंगे, जो भारतीय नौसेना की ‘ट्विन
कैरियर ऑपरेशंस’ संचालित करने की क्षमता का प्रदर्शन करेंगे।
कमांडर
विवेक मधवाल ने बताया कि प्रतिवर्ष होने वाला यह सम्मेलन नौसेना कमांडरों
के लिए समुद्री सुरक्षा से संबंधित रणनीतिक गतिविधियों, परिचालन एवं
प्रशासनिक मामलों पर विचार-विमर्श करने के उद्देश्य से एक मंच के रूप में
कार्य करता है। यह सम्मेलन उभरती हुई भू-राजनीतिक परिस्थितियों, आंचलिक
चुनौतियों और मौजूदा अस्थिर समुद्री सुरक्षा स्थिति की पृष्ठभूमि में होगा।
यह कमांडर कॉन्फ्रेंस भारतीय नौसेना के भविष्य की कार्यप्रणाली को आकार
देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस
तीन दिवसीय कार्यक्रम के दौरान नौसेना कमांडरों को संबोधित करेंगे। सम्मेलन
के दौरान चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ व भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना के
प्रमुख नौसेना कमांडरों के साथ सामान्य राष्ट्रीय सुरक्षा माहौल सुनिश्चित
रखने में तीनों सेनाओं के सम्मेलन पर चर्चा करेंगे। वे देश में तथा भारत के
राष्ट्रीय हितों की रक्षा में तीनों सेनाओं के बीच तालमेल और तत्परता
बढ़ाने के अन्य उपाय भी ढूंढेंगे। उद्घाटन सत्र में रक्षा मंत्री दोनों
विमानवाहक पोतों को देखने के लिए समुद्र में उतरेंगे।
दरअसल, पिछले
छह महीनों में इजराइल-हमास के बीच चल रहे संघर्ष के कारण हिंद प्रशांत
क्षेत्र में भू-राजनीतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण बदलाव देखे गए हैं।
व्यापारिक जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों के साथ-साथ समुद्री डकैती की
घटनाओं में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है। भारतीय नौसेना ने इन उभरते खतरों का
अपने सामर्थ्य एवं संकल्प के साथ करारा जवाब दिया है और 'क्षेत्र में
पसंदीदा सुरक्षा भागीदार' के रूप में अपनी प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया
है।
इसी के मद्देनजर नौसेना कमांडरों का यह सम्मेलन तेजी से
परिवर्तित हो रहे समुद्री माहौल के बीच नौसेना के भविष्य की दिशा तय करने
के लिए एक निर्णायक भूमिका निभाएगा। यह सम्मेलन रणनीतिक स्पष्टता, परिचालन
उत्कृष्टता, तकनीकी नवाचार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देकर भारत के
समुद्री हितों की रक्षा करने तथा क्षेत्र में एक जिम्मेदार समुद्री ताकत के
रूप में अपनी स्थिति को बनाए रखने के लिए नौसेना की प्रतिबद्धता की पुष्टि
करता है।





