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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 5:28 · नई दिल्ली संस्करण

काम के अधिकार की रक्षा हेतु 8 जनवरी से 25 फ़रवरी तक चलेगा राष्ट्रव्यापी अभियान: नदीम अंसारी

राष्ट्रीय सागर डेस्क2 मिनट का पठन
काम के अधिकार की रक्षा हेतु 8 जनवरी से 25 फ़रवरी तक चलेगा राष्ट्रव्यापी अभियान: नदीम अंसारी

पटना। काम के अधिकार की रक्षा हेतु कांग्रेस पार्टी चलाएगी राष्ट्रव्यापी अभियान । उक्त बातें बिहार प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता नदीम अंसारी ने कही। उन्होंने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने ये निर्णय लिया की “मनरेगा” को बचाने के लिए “मनरेगा बचाओ संग्राम” करेगी।महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), जिसे वर्ष 2005 में यूपीए सरकार द्वारा लागू किया गया था, एक अधिकार-आधारित कानून है जो प्रत्येक ग्रामीण परिवार को मजदूरी रोजगार की मांग करने का वैधानिक अधिकार देता है। कानून के तहत राज्य सरकार 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए बाध्य है, अन्यथा बेरोजगारी भत्ता देय होता है। यही वैधानिक गारंटी मनरेगा की मूल और परिभाषित विशेषता है।मनरेगा ग्रामीण आजीविका सुरक्षा की रीढ़ रहा है। यह प्रतिवर्ष 5-6 करोड़ परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराता है, मजबूरी में होने वाले पलायन को कम करता है, ग्रामीण मजदूरी बढ़ाता है और टिकाऊ सामुदायिक परिसंपत्तियों का निर्माण करता है। इसकी मांग-आधारित संरचना, सुनिश्चित मजदूरी और सीधे बैंक भुगतान की व्यवस्था से विशेष रूप से महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और वंचित समुदायों को लाभ हुआ है, जिनमें महिलाओं की हिस्सेदारी कुल कार्यदिवसों का लगभग 60 प्रतिशत है।नया VB-GRAM-G अधिनियम इस पूरे ढांचे से एक मौलिक विचलन है। यह काम की वैधानिक गारंटी को समाप्त करता है, निर्णय प्रक्रिया का केंद्रीकरण केंद्र सरकार के हाथों में करता है, ग्राम सभाओं और पंचायतों को कमजोर करता है तथा केंद्र के मजदूरी अंशदान को लगभग 90 प्रतिशत से घटाकर 60 प्रतिशत कर देता है, जिससे वित्तीय बोझ राज्यों और श्रमिकों पर डाल दिया जाता है। बजट-सीमित आवंटन, कृषि के चरम मौसम में कार्य पर प्रतिबंध और मजदूरी सुरक्षा प्रावधानों का कमजोर होना अनिवार्य रूप से रोजगार में कमी, मजदूरों के दमन और ग्रामीण संकट में वृद्धि का कारण बनेगा। कार्यक्रम से महात्मा गांधी के नाम को हटाया जाना भी श्रम की गरिमा और ग्राम स्वराज के उन मूल्यों को कमजोर करने का प्रयास दर्शाता है, जिन पर मनरेगा आधारित है।ग्रामीण आजीविकाओं पर इस गंभीर हमले की गंभीरता को देखते हुए, कांग्रेस कार्यसमिति ने 27 दिसंबर 2025 को हुई अपनी बैठक में सर्वसम्मति से "मनरेगा बचाओ संग्राम" नामक एक राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया, ताकि काम के अधिकार की रक्षा की जा सके और मनरेगा को उसके मूल अधिकार-आधारित स्वरूप में बहाल किया जा सके।विस्तृत कार्यक्रम8 जनवरी PCC-स्तर की तैयारी बैठकें10 जनवरी जिला-स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस11 जनवरी एक दिन का उपवास, प्रतीकात्मक विरोध12 जनवरी - 29 जनवरी पंचायत-स्तर जनसम्पर्कसभी ग्राम पंचायतों में चौपालेंविधानसभा-स्तरीय नुक्कड़ सभाएं और पैम्फलेट वितरण30 जनवरी वार्ड-स्तरीय शांतिपूर्ण धरना31 जनवरी - 6 फरवरी जिला-स्तरीय 'मनरेगा बचाओ' धरना7 फरवरी - 15 फरवरी राज्य-स्तरीय विधानसभा घेराव16 फरवरी - 25 फरवरी आंचलिक AICC 'मनरेगा बचाओ' रैलियां ( देश के चार प्रमुख स्थानों पर)

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