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सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 · सुबह 4:46 · नई दिल्ली संस्करण

इंदौर में दूषित पानी से 18 मौत, 03 वेंटिलेटर पर

राष्ट्रीय सागर डेस्क3 मिनट का पठन
इंदौर में दूषित पानी से 18 मौत, 03 वेंटिलेटर पर

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से जुड़ी मौतों का आंकड़ा बढ़कर 18 हो गया है। दूषित पानी से कथित तौर पर एक और बुजुर्ग महिला की मौत हो गई है। मृतक महिला का नाम कुलकर्णी भट्टा निवासी 80 वर्षीय हर्कुवर घुरैया है। वहीं 16 लोग अभी भी आईसीयू में भर्ती हैं, जिनमें से तीन की हालत नाजुक बनी हुई है और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है।परिजनों के अनुसार, हर्कुवर 20 दिसंबर को अपनी बेटी निर्मला कोरी के पास भागीरथपुरा रहने आई थीं। 30 दिसंबर को अचानक उन्हें उल्टी-दस्त की शिकायत हुई, जिसके बाद बेटी ने पास के मेडिकल स्टोर से दवाई लाकर दी और उन्हें वापस उनके बेटे सुनील के घर कुलकर्णी भट्टा छोड़ दिया। एक जनवरी को फिर से तबीयत बिगड़ने पर तीन पुलिया स्थित मेडिकल से दवाई लाई गई। इसके बाद फिर उनकी तबियत बिगड़ गई और उन्होंने दम तोड़ दिया। परिजनों का कहना है कि दूषित पानी ही उनकी सेहत का दुश्मन बन गया। हालांकि यह पूरा मामला फिलहाल जांच में है।इधर, लोग अब नल के पानी को हाथ तक नहीं लगा रहे। चाय की दुकानों से लेकर घरों के रसोईघरों तक, हर जगह नल के पानी की जगह सील पैक बोतलों और आरओ वाटर ने ले ली है। भागीरथपुरा की मशहूर टोपीवाली चाय की दुकान हो या फिर गली-मोहल्लों की छोटी दुकानें, सभी जगह चाय और खाने-पीने की चीजें बोतलबंद पानी से ही बनाई जा रही हैं। दुकानदार कहते हैं कि नल का पानी इस्तेमाल करने का जोखिम अब कोई नहीं लेना चाहता।इस बीच प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी घर-घर पहुंचकर सर्वे कर रही हैं। यह सर्वे भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की विशेष केएबीओ टूल किट के माध्यम से किया जा रहा है। इसके तहत हर परिवार से बीमारी के लक्षण, पानी के उपयोग, स्वास्थ्य स्थिति और हालिया बीमारियों से जुड़ी विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है।अधिकारियों का कहना है कि इस डेटा के आधार पर यह आकलन किया जाएगा कि दूषित पानी से कितने लोग प्रभावित हुए हैं और किन घरों या क्षेत्रों में संक्रमण का खतरा सबसे अधिक है।विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम भी इस मामले में सक्रिय है। टीम पानी के सैंपलों की जांच कर यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर पानी में कौन-सा बैक्टीरिया या रोगाणु मौजूद है जिसने इतनी तेजी से लोगों को बीमार किया और जानलेवा साबित हुआ। प्रारंभिक आशंका है कि पानी की सप्लाई लाइनों में सीवेज का गंदा पानी मिल जाने से यह संकट खड़ा हुआ है, हालांकि अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।मध्य प्रदेश सरकार की बात करें तो अब तक मृतकों की संख्या को लेकर कोई स्पष्ट और विस्तृत आधिकारिक सूची जारी नहीं की गई है। हालांकि, राज्य स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने गंभीर मरीजों के इलाज और स्थिति पर निगरानी की पुष्टि की है। प्रशासन की ओर से कहा गया है कि प्रभावित इलाके में टैंकरों के जरिए साफ पानी की आपूर्ति की जा रही है और पानी की लाइनों की जांच व मरम्मत का काम तेजी से चल रहा है।दूसरी ओर भागीरथपुरा के लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि समय रहते पानी की पाइपलाइनों की जांच और शिकायतों पर ध्यान दिया गया होता, तो शायद यह भयावह स्थिति पैदा नहीं होती। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वे लंबे समय से बदबूदार और गंदे पानी की शिकायत कर रहे थे, लेकिन प्रशासन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया गया।

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